विद्युत वितरण कम्पनियां अब शासकीय जन सेवा की जगह केवल कंपनियों की तरह अपना मुनाफा देख रही हैं. इसका सबसे बड़ा जरिया यही है कि बिजली की उपभोक्ता दरें बढ़ाते जाओ. 3 महीने पहले 40 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाए. एक जुलाई से फिर 13 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाए और यह अधिकार ले लिया की फ्यूल कास्ट के नाम पर हर तीसरे महीने इसमें इजाफा किया जा सकता है.

अब इसके अलावा ये कंपनियां ”लाईन लॉस में कमी लाने के लिए भी व्यापक प्रयास कर रही हैं. प्रयास यह भी हो रहा है कि ताप विद्युत गृहों का पावर लोड फेक्टर बढ़ाया जाए और विद्युत ट्रांसमिशन लॉस का स्तर न्यूनतम लाया जाए. लेकिन विद्युत के व्यवसाय और उपयोग में कंपनियों व उपभोक्ता को सबसे ज्यादा नुकसान और दर वृद्धि विद्युत चोरी से हो रही है. यह मान लिया गया है कि लगभग आधी बिजली 50 प्रतिशत चोरी में जा रही है. इस चोरी में झुग्गीवासी गरीबों से कहीं बहुत ज्यादा अमीर वर्ग और कारखाने वाले हैं. अभी हाल ही में एक बड़ी बिजली चोरी पकड़ी तो घर में 6 ए.सी. चोरी की बिजली से चलते पाये गए. ए.सी. में बिजली का खर्च ज्यादा आता है इसलिए इसका प्रयोग करने वाले चोरी भी ज्यादा कर रहे हैं. विद्युत कम्पनियों की राजस्व वृद्धि की मुहिम और उपभोक्ताओं को दरों में राहत चोरी रोकने से ही मिल सकती है. काले धन की तरह ”काली बिजली” भी इतनी है कि यदि यह हासिल कर ली जाए तो शायद 10 पैसे प्रति यूनिट में उपभोक्ता को बिजली दी जा सकती है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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