इन्दौर. 3 नवंबर (व्यापार प्रतिनिधि), देश के उत्पादक राज्यों की मंडियों में सोयाबीन की दैनिक आवक 11 लाख बोरी तक पहुंच गई है। चालू सप्ताह के अंत तक आवक बढ़कर लगभग 12 लाख बोरी तक पहुंचने की संभावना है। यह सीजन की पीक सप्लाई होगी।

त्योहारी सीजन समाप्त होने के बाद मंडियों में सोयाबीन की आवक बढऩे लगी है। बढ़ती आवक के दबाव से आने वाले कुछ दिनों में सोयाबीन की कीमत लगभग 100 रुपये गिरकर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे जा सकती हैं। त्योहारों के चलते सोयाबीन की कटाई धीमी पडऩे के कारण अक्टूबर में आवक हल्की रही। गत सप्ताह दीपावली के कारण मंडियों में आवक कम रही लेकिन अब सोयाबीन की आवक बढ़ रही है। वहीं इस साल उत्पादन भी गत वर्ष से अधिक होने का अनुमान है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल का कहना है कि इस साल अक्टूबर में सोयाबीन की आवक गत वर्ष की तुलना में काफी कम रही। पिछले साल अक्टूबर में देशभर में सोयाबीन की कुल आवक 21 लाख टन के करीब थी जबकि इस साल अक्टूबर में सिर्फ 14 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई।

मध्य प्रदेश की मंडियों में फिलहाल 5.5-6 लाख बोरी सोयाबीन की दैनिक आवक हो रही है। महाराष्ट्र में 2.5-2.8 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हो रही है। राजस्थान में 2-2.4 लाख बोरी प्रतिदिन सोयाबीन मंडियों में पहुंच रही है।  राज्य की मंडियों में सोयाबीन का भाव 2050-2150 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। इस सप्ताह के अंत तक प्रदेश में आवक बढ़कर सात लाख बोरी प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। आवक बढऩे से सोयाबीन की कीमतें लगभग 100 रुपये गिरकर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे जा सकती है। महाराष्ट्र में फिलहाल 2.5-2.8 लाख बोरी सोयाबीन की आवक हो रही है। इसी प्रकार राजस्थान की मंडियों में 2-2.4 लाख बोरी प्रतिदिन मंडियों में पहुंच रही है।

वर्तमान भावों पर सोया प्लांट वाले भी अपना स्टॉक बढ़ाने से बच रहे हैं। प्लांट वालों को भी उम्मीद है कि सोयाबीन के भाव में करीब 100 रुपये प्रति क्विटंल की गिरावट आ सकती है। कुछ कारोबारियों का कहना है कि अगले एक-डेढ़ माह में सोयाबीन के भावों में तेजी की कोई संभावना नहीं है। उधर, अर्जेंटीना में भी मौसम सोयाबीन की फसल के अनुकूल है ऐसे में विदेशी बाजारों में भी इसके दाम नरम बने रहेंगे।
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सोयाबीन की पैदावार तो हर साल बढ़ रही है, लेकिन प्लांटों की क्षमता 225 लाख टन है उस लिहाज से उत्पादकता और बढऩी चाहिए. उत्पादकता बढ़ाने के लिए और प्रयास होना चाहिए. हम पूरी तरह वैश्विक बाजार से जुड़े है, वहां की तेजी-मंदी का असर तो यहां रहेगा ही.
-राजेश अग्रवाल, सोपा अध्यक्ष

वायदा की शुरुआत किसानों के  हित के लिए हुई थी, लेकिन इसका लाभ किसानों के बजाय सटोरियों को ज्यादा मिल रहा है. किसान ज्यादा दिन तक माल रोक नहीं पाते है, इसका लाभ सटोरियों को मिलता है. सीजन के शुरुआती महीनों में सटोरिये तेजी नहीं आने देते है.
-रमणलाल जैन,ब्रोकर

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