आर्थिक अपराध अनुसंधान में आई.टी. के उपयोग संबंधी सेमीनार में गृह मंत्री

भोपाल,12 अप्रैल,वही अधिकारी सी.बी.आई. में काम करता है तो भरोसा और और अगर वही सी.आई.डी. में काम करे तो उसमें भरोसा नहीं. इस पर गंभीरता से विचार कर सी.आई.डी. को इतना सक्षम बनाएँ कि लोग सी.बी.आई. की जगह सी.आई.डी. जाँच की माँग करें. गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता पी.टी.आर.आई. में आर्थिक अपराधों पर सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग विषयक सेमीनार में बोल रहे थे.

गृह मंत्री ने बेबाकी से कहा कि सभी संस्थाएँ आम लोगों के हित संरक्षण के लिए बनी हैं, न कि वर्ग विशेष के लिए. उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों की जाँच के लिए जो भी उपकरण और विशेषज्ञता चाहिए वह सब उपलब्ध करवायी जाये. यहाँ पदस्थ अमले को विशेष सुविधाएँ दी जाये और लम्बे समय तक पदस्थ रखा जाए, जिससे उनकी विशेषज्ञता का लाभ मिल सके. गृह मंत्री ने कहा कि सामान्य अपराधों में वृद्धि का एक कारण आर्थिक अपराध हैं. इससे योजनाओं का लाभ आम-आदमी तक नहीं पहुँच पाता है. उन्होंने कहा कि विभाग में अच्छे अधिकारियों को प्रोत्साहित करें. इससे दूसरे अधिकारी प्रेरणा लेंगे. गृह मंत्री ने कहा कि सेमीनार सिर्फ औपचारिकता न बने.

यहाँ बतायी जाने वाली तकनीकों का अनुसंधान में उपयोग करें. उन्होंने कहा कि बिना इडेन्टिटी प्रूफ के सिम बेचने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करें.पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने कहा कि पूरे देश में जितनी राशि की चोरी की रिपोर्ट दर्ज होती है उससे एक लाख गुना राशि के आर्थिक अपराध हैं. उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध समाज के लिए बड़ा खतरा हैं, इसे रोकने के हर-संभव उपाय होने चाहिए. महानिदेशक ई.ओ.डब्ल्यू. रमेश शर्मा ने कहा कि जिस गति से आर्थिक अपराध बढ़ रहे हैं, उसके लिए जरूरी है कि जिला एवं संभाग स्तर पर भी जाँच प्रकोष्ठ बनें. उन्होंने आर्थिक अपराध को आर्थिक आतंकवाद की संज्ञा देते हुए कहा कि बड़े विभागों में विजिलेंस आफीसर नियुक्त होने चाहिए.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त संगठन सुखराज सिंह ने कहा कि सीरियस फ्रॉड और व्हाइट कॉलर क्राइम को रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग जरूरी है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण राजेन्द्र कुमार ने सेमीनार का उद्देश्य बताते हुए कहा कि आई.टी. के उपयोग से अपराधियों को पकडऩे में मदद मिलेगी. विषय-विशेषज्ञ कृष्णा और उनके सहयोगियों ने आर्थिक अपराध अनुसंधान के उपयोग में आई.टी. के बेहतर उपयोग और उसकी सार्थकता के बारे में जानकारी दी. सेमीनार में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जिलों के सबंधित पुलिस अधिकारी शामिल हुए.

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