epfनई दिल्ली,  वित्तमंत्री अरुण जेटली को भले ही ईपीएफ टैक्स पर कदम पीछे खींचने पड़े हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने पेंशंड सोसायटी बनाने का इरादा छोड़ा नहीं है.

एक अधिकारी ने बताया कि सरकार एंप्लॉयर्स के लिए यह अनिवार्य करना चाहती है कि वे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स में अपने योगदान का अधिकांश हिस्सा एंप्लॉयी पेंशन स्कीम में डालें, न कि ईपीएफ में. उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए की जानी है, जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये प्रतिमाह से ज्यादा हो.

अभी प्राइवेट सेक्टर एंप्लॉयर्स को प्रॉविडेंट फंड में एंप्लॉयी के कॉन्ट्रिब्यूशन के बराबर योगदान करना होता है.एंप्लॉयी कॉन्ट्रिब्यूशन की पूरी रकम पीएफ में जाती है जबकि एंप्लॉयर का 8.33फीसद हिस्सा एंप्लॉयी पेंशन स्कीम में जाता है, जो मैक्सिमम 1,250 रुपये मंथली हो सकता है.

यह 15000 रुपये का 8.33 फीसद होता है. इस नियम को बदले जाने से यह सुनिश्चित होगा कि ऐसे कर्मचारियों के मामले में एंप्लॉयर कॉन्ट्रिब्यूशन का अच्छा-खासा हिस्सा प्रॉविडेंट फंड अकाउंट में न जाए, जिसे बगैर टैक्स पेमेंट निकाला जा सकता है. इस कदम से ईपीएफ और जनरल प्रॉविडेंट फंड बराबरी पर आ जाएंगे. सरकार के इस आइडिया का टैक्स एक्सपर्ट्स ने स्वागत किया है.

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