नई दिल्ली. यूरोप का गहराता संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ घरेलू स्तर पर भी संकट बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती रुपये को लगातार कमजोर कर रही है। शुक्रवार को भी रुपये की कीमत ढलान पर रही और एक डॉलर 54.91 रुपये तक पहुंच गया। रिजर्व बैंक के रुपये को समर्थन देने की नीति जारी रखने के बयान के बाद रुपया संभला और 54.42 पर आकर रुका।

ग्लोबल अर्थव्यवस्था में मंदी की आहट ने निवेशकों को सुरक्षित पनाहगाह तलाशने पर मजबूर कर दिया है। नतीजतन निवेशकों ने एशिया समेत सभी बाजारों से अपना निवेश निकालना शुरू कर दिया है। रुपये की कीमत पर भी इसका असर पड़ा है। वैसे, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये की गिरती कीमत को रोकने की कोशिशें करता रहेगा। ऐसा करने में रिजर्व बैंक के लिए भी दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। रुपये की कीमत को संभालने के फेर में देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 291.80 अरब डॉलर तक आ गया है। बढ़ते आयात के मद्देनजर सरकार के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है।

माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक तेल कंपनियों की डॉलर मांग को पूरा करने के लिए सीधी खिड़की खोल सकता है। अभी आयातक अलग-अलग बैंकों की मार्फत डॉलर खरीदते हैं जिसके चलते संट्टेबाजी को बढ़ावा मिलता है। इसलिए संभव है कि रिजर्व बैंक इन कंपनियों की डॉलर मांग को खुद ही पूरा करेगा। डॉलर की मांग को नियंत्रित करने में रिजर्व बैंक की भूमिका बाजार में नकदी की समस्या भी पैदा कर रही है। इसे दूर करने के लिए रिजर्व बैंक लगातार सरकारी बांड खरीद रहा है। सरकार हर हफ्ते तकरीबन 15000 करोड़ रुपये के बांड जारी कर रही है। इसके चलते जून में बाजार में नकदी का संकट पैदा हो सकता है क्योंकि इस महीने कंपनियों को अग्रिम कर का भुगतान भी करना है।

पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में मचे इस घमासान के मूल में यूरोप का संकट ही है। इटली के 26 बैंकों की रेटिंग घटने के बाद अब स्पेन के 16 बैंकों की रेटिंग ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने ग्रीस की रेटिंग भी ‘बी माइनस’ से घटाकर सीसीसी कर दी है। जानकारों का मानना है कि जब तक यूरो संकट का हल नहीं निकलता वित्तीय बाजारों में उठापठक जारी रहेगी।

कच्चे तेल की कीमत में तेजी
पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता के बीच एशियाई कारोबार में आज कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ा सुधार आया। समूह आठ में शामिल देशों के आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने तथा खर्चों में कटौती के उपाय किए जाने के संकेत से भी तेल की कीमत पर असर पड़ा है। न्यूयार्क का मुख्य अनुबंध वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत जून डिलिवरी के लिए 43 सेंट्स बढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल रही।वहीं ब्रेंट नार्थ सी कच्चे तेल की कीमत जुलाई डिलिवरी के लिए 65 सेंट्स बढ़कर 107.79 डॉलर प्रति बैरल रही। जी-आठ के नेताओं ने शनिवार को ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिम एशियाई देश पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। बगदाद में ईरान तथा पश्चिमी देशों के बीच होने वाली बातचीत से पहले जी-आठ ने यह संदेश दिया है।

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