पूर्वी एशिया सम्मेलन में मनमोहन ने दिया व्यापार-विनिवेश बढ़ाने पर जोर

बाली, 20 नवंबर. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में आर्थिक मंदी के दौर को स्वीकार करते हुए विश्वास जताया है कि इन परिस्थितियों के बावजूद देश 7.5 फीसदी की विकास दर हासिल कर लेगा. यहां पूर्वी एशिया सम्मेलन में उन्होंने सदस्य देशों के बीच व्यापार और विनिवेश बढ़ाने पर जोर दिया।

 

  • मिलकर करना होगा प्रयास

यूरोजोन संकट का जिक्र करते हुए मनमोहन ने कहा कि इससे तनाव और चिंता बढ़ी है। सभी देशों को इसके समाधान के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। यूरोजोन संकट से विश्व अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह जरूरी है कि सभी देश व्यापार, निवेश, सेवाओं और विचारों के स्तर पर खुलकर सहयोग करें। मौजूदा दौर में कोई भी देश अलग-थलग रहते हुये समृद्धि हासिल नहीं कर सकता।

  • 2011 में घटी हमारी भी प्रगति

आर्थिक मंदी की बात स्वीकार करते हुए मनमोहन ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत की भी आर्थिक प्रगति वर्ष 2011 में कम हुई है। वैसे इसके बावजूद उम्मीद है कि हम 7.5 फीसदी की विकास दर हासिल कर लेंगे।  प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व एशियाई देशों के आर्थिक एकीकरण के लिए समग्र, भागीदारी समझौता (सीईपीईए) संपन्न कराने में भारत अपनी भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साथ भी भारत आर्थिक भागीदारी को अंतिम रूप देने की कोशिश में है।

सुरक्षा परिषद में दावेदारी का समर्थन

अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की बढ़ती साख को देखते हुए सिंगापुर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट देने की वकालत की है. सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सेन लूंग ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सिंगापुर यात्रा के पहले दिन ही सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट दिए जाने की भारत की दावेदारी का समर्थन किया. ली सेन लूंग ने कहा कि एशिया में स्थिरता और विकास लाने में भारत की भूमिका अहम है. ली के अनुसार भारत एशिया देशों के समूह का एक अहम भागीदार है और क्षेत्र के निर्माण में उसकी प्रमुख भूमिका है.  इसके अलावा आसियान देशों के बीच होने वाली बातचीत में भी भारत की मुख्य भूमिका रहेगी.

सिंगापुर को निवेश का न्योता

भारत की महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास योजना में सिंगापुर को महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उसे दक्षिण एशियाई देश में निवेश के लिए रविवार को न्योता दिया। भारत को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अगले पांच साल में 1000 अरब डालर के निवेश की जरूरत है। दो दिवसीय यात्रा पर यहां आए मनमोहन ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के साथ सुरक्षा तथा रक्षा क्षेत्र में सहयोग समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की और निवेश की पुरजोर वकालत की।  ली ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया। सिंगापुर के प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित दोपहर भोज के दौरान मनमोहन ने कहा कि हमारी सरकार सिंगापुर के साथ संबंधों को खासी अहमियत देती है। हमारा सहयोग बहुलवाद, धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतंत्र के साझा मूल्य तथा क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दृष्टिकोण की समानता पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर हमारी बुनियादी ढांचा विकास की महत्वाकांक्षी योजना के लिए एक प्रमुख सहयोगी के रूप में उभरा है। आसियान देशों में यह भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश सहयोगी है। उन्होंने कहा कि हम सिंगापुर से बड़े पैमाने पर निवेश तथा प्रौद्योगिकी के प्रवाह का स्वागत करते हैं। दोपहर भोज से पहले ली के साथ बातचीत के दौरान सिंह ने निवेश के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने यह रेखांकित किया कि भारत को अपने बुनियादी ढांचा तथा अन्य क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर कोष की जरूरत है। सरकार ने अगले साल में केवल बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1000 अरब डालर के निवेश की जरूरत का अनुमान जताया है।

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