तालाबों को बचाने के लिये कानून बनेगा

मध्यप्रदेश में नहीं होगा पानी का निजीकरण शिवराज

भोपाल,6 जुलाई, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में हर गाँव और शहर की अपनी जल संरचना हो, इसका अभियान चलाया जायेगा. पानी पर सबका अधिकार है, इसका निजीकरण नहीं होगा. प्रदेश में तालाबों को बचाने के लिये कानून बनाया जायेगा.

मुख्यमंत्री चौहान आज यहां वाटर सेनीटेशन सेनेरियो वर्कशाप को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने इस मौके पर सेंटर फॉर साइंस एण्ड इन्वायरन्मेंट द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट एक्सक्रीटा मेटर्स का विमोचन भी किया. कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया और सेंटर फॉर साइंस एण्ड इन्वायरन्मेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण भी उपस्थित थीं. चौहान ने कहा कि नदियों का पुनर्जीवन एक बड़ी चुनौती है. प्रदेश में नर्मदा को प्रदूषण मुक्त कर आदर्श नदी बनाने की योजना बनायी जा रही है. उन्होंने कहा कि यह विचार किया जाना चाहिये कि विकास किसका हो और किसकी कीमत पर हो. भू-जल की अपनी सीमाएँ हैं. इसे रिचार्ज नहीं करने से पानी की कमी की समस्या पैदा हुई है. प्रदेश में चलाये गये जलाभिषेक अभियान में सात लाख से अधिक जल संरचनाएँ बनायी गयी हैं.

इसे जनांदोलन का रूप दिया गया है. हर जिले में एक नदी को पुनर्जीवित करने का काम भी शुरू किया गया है. उन्होंने कहा कि खेतों में डाले जाने वाले रासायनिक खाद से भी जल प्रदूषित होता है. कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ पानी की शुद्धता के लिये हमें इस प्रदूषण की भी चिंता करनी होगी. इसके लिये जैविक खाद का उपयोग बढ़ाना होगा. चौहान ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट का प्रश्न भी महत्वपूर्ण है. प्रदेश में खुले में शौच पर रोक के लिये मर्यादा अभियान चलाया गया है. अब शहरी स्वच्छता मिशन भी शुरू किया जा रहा है. बुन्देलखण्ड के पुराने तालाबों को नदियों से जोडऩे की योजना भी शुरू की गयी है.

उन्होंने कहा कि प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि दोहन होना चाहिये. प्रकृति से उतना ही लिया जाना चाहिये जिसकी भरपाई वह कर सके. उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में शुद्ध पानी उपलब्ध करवाना हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि एक्सक्रीटा मेटर्स का अध्ययन शहरों की योजनाएँ बनाते समय किया जायेगा. कार्यक्रम में सुश्री सुनीता नारायण ने अपनी सर्वे रिपोर्ट की प्रस्तुति दी. उन्होंने कहा कि जो शहर अपने पानी और उसके निकास के बारे में नहीं सोचता वह अपने नदियों और तालाबों को नहीं बचा सकता. आने वाले समय में पानी की जरूरत और बढ़ेगी. शहरों में पानी की कमी नहीं है परंतु वितरण में असमानता है और पानी की हानि ज्यादा है. देश में अपने तालाबों को बचाने वाले शहर बहुत कम हैं. सीवेज ट्रीटमेंट की ओर नगरीय निकायों का ध्यान नहीं है. उन्होंने कहा कि साफ पानी पर सबका हक है उसके लिये अर्फोडेबल वॉटर सप्लाई की बात करना होगी. जो शहर वर्षा के पानी की चिंता नहीं करेगा बच नहीं पायेगा.

कार्यक्रम में राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी. द नेचर वालेंटियर संस्था के अध्यक्ष भालू मोंडे ने इंदौर के सिरपुर तालाब के संरक्षण के प्रयासों की जानकारी दी. कार्यशाला का आयोजन राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर साइंस एण्ड इन्वायरन्मेंट और द नेचर वॉलेंटियर संस्था द्वारा किया गया था. संचालन वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खाण्डेकर ने किया. आभार प्रदर्शन प्रोफेसर व्ही.के. सेठी ने किया.इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सिरपुर लेक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया.

Related Posts: