गौ संरक्षण एवं संवर्धन में धन की कमी नहीं

भोपाल, 13 जून, नभासं. प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाली गौ-शालाओं को पुरस्कृत किया जायेगा. प्रथम पुरस्कार के रूप में 5 लाख, द्वितीय पुरस्कार में 3 लाख और तृतीय पुरस्कार के रूप में 2 लाख रूपये दिये जायेंगे.

यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज यहाँ मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड की बैठक में लिया गया. बैठक में पशुपालन मंत्री श्री अजय विश्नोई और अपर मुख्य सचिव श्री आई.एस. दाणी मौजूद थे. मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि गौ-शालाओं के संचालकों और कृषकों को जैविक कृषि विस्तार के संबंध में जानकारी दी जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर गौ-शाला संचालक, स्थानीय कृषक और जैविक कृषि और उत्पाद के क्षेत्र में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के सम्मेलन किये जाये. सम्मेलन के माध्यम से जैविक कृषि से संबंधित नीति, नियम और योजनाओं की जानकारी दी जाये. मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के कार्यों में धन की कमी नहीं आने दी जायेगी. उन्होंने कहा कि गौ-शालाओं और पशुधन संरक्षण के कार्यों के लिये जितनी भी राशि आवश्यक होगी वह उपलब्ध करवायी जायेगी.

उन्होंने गौ पशुधन की देखभाल पर प्रतिदिन होने वाले व्यय का पुनरीक्षण करने की जरूरत भी बतायी. उन्होंने कहा कि व्यय की सीमा को व्यवहारिक बनाया जाये. मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा योजना के साथ समन्वय कर गौ-शालाओं के कार्य अधोसंरचना मद में कार्य करवाये जा सकते हैं. उन्होंने सुसनेर के गौ-अभयारण्य के संबंध में भी जानकारी ली. बैठक में मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड की कार्य-परिषद के अध्यक्ष श्री शिव चौबे ने बताया कि गौ-संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित विषयों पर राष्ट्रीय कार्यशाला की जायेगी. उन्होंने बताया कि गौ-शालाओं को, स्वावलम्बन के लिये उन्हें उद्यमिता से जोडऩा आवश्यक है. इस परिप्रेक्ष्य में गौ-उत्पादों के महत्व, उपयोग और उनके मूल्य संवर्धन की जानकारी तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था बोर्ड द्वारा की गयी है. उन्होंने बताया कि कामधेनु गौ-शाला, गौ-विज्ञान अनुसंधान केन्द्र शारदा विहार भोपाल को पंचगव्य उत्पाद प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित करने में सहयोग किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान गौ-शालाओं के व्यवस्थापकों को विभिन्न गौ-उत्पादों से औषधि बनाने, कीटनाशक तैयार करने और प्रसाधन सामग्री बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा. बैठक में बताया गया कि कामधेनु गौ-अभयारण्य सुसनेर की अधोसंरचना निर्माण और अन्य कार्यों के लिये दो करोड़ रूपये की परियोजना बनायी गयी है.

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