उज्जैन में लोकायुक्त  का छापा

उज्जैन. वर्षों से विकास प्राधिकरण में रहकर लगातार भ्रष्टाचार कर रहे कार्यपालन यंत्री पर आखिरकार लोकायुक्त की नजरें आ ही गई. मंगलवार की अलसुबह क्षीर सागर स्थित तथा उसके गांव के मकान पर एक साथ छापा मारा गया और करोड़ों का मामला लोकायुक्त के सामने आ गया.

प्राधिकरण में 1986 में अपनी सेवाएं शुरू करने वाला वर्तमान में कार्यपालन यंत्री हुकुमसिंह पाटीदार के दो निवासों पर एक साथ मंगलवार को लोकायुक्त की टीम ने छापे की कार्रवाई कर पंचनामा बनाया. पाटीदार ने अपने रिश्तेदारों तथा परिजनों के नाम से जमकर प्रॉपर्टी में निवेश किया था तथा लाखों की ज्वेलरी भी खरीदी थी. शुरूआती जांच में लोकायुक्त को डेढ़ लाख रूपए नगद दो चौपहिया वाहन, तीन मोटरसायकलें, सोने-चांदी के जेवर व अन्य घरेलू कीमती सामान जप्त हुआ है. पाटीदार का घट्टिया में रेस्टोरेंट तथा इंदौर में सुखायु हॉस्पिटल होकर डेढ़ सौ बीघा जमीन के कागजात भी मिले हैं. पाटीदार के प्राधिकरण की स्कीम में ही करोड़ों केतीन बेशकीमती प्लाट हैं  जो उसकी मां पत्नी के नाम से हैं. खास बात यह है कि उक्त कॉलोनियां इस कार्यपालन यंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान ही विकसित की थी.

कोल्ड स्टोरेज सहित एक कृषि फार्म भी ग्राम छीतरखेड़ी में मिला है. बकौल एसपी लोकायुक्त अरूण मिश्र 26 वर्ष की नौकरी में वेतन 30 लाख रूपए पाटीदार को मिले थे जिसमें से 12 लाख का खर्च मानते हुए भी 18 लाख से कई गुना अधिक की सम्पत्ति पाटीदार के पास है. प्रथम दृष्टया मामला 11 करोड़ से ऊपर जा रहा है. कुछ दिनों पूर्व ही पाटीदार का तबादला ग्वालियर किया गया था जो कि उसने निरस्त करा लिया था. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

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