भोपाल,5 जुलाई, कमिश्नर भोपाल संभाग प्रवीण गर्ग की अध्यक्षता में आज सनसनीखेज एवं गंभीर अपराधों की संभागस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई . बैठक में आई.जी.भोपाल विजय यादव सहित भोपाल, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ तथा सीहोर जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौजूद थे.

बैठक के दौरान पुलिस विवेचना और न्यायालय में लंबित मामलों, दोषमुक्ति के मामलों में अपील, विवेचक अभियोजकों की भूमिका, चिन्हांकित प्रकरणों की समय रहते विवेचना तथा शीघ्र अभियोजन आदि की जिलेवार व्यापक समीक्षा की गई .

विवेचना में लम्बा समय नहीं
पुलिस विवेचना और न्यायालय में लंबित प्रकरणों की समीक्षा के दौरान कमिश्नर प्रवीण गर्ग ने कहा कि इसमें यह ध्यान रखा जाये कि विवेचना बहुत लम्बी नहीं खिचें . इसी तरह अभियोजकों को भी चाहिए कि वे युक्तियुक्त और गंभीर कारणों का उल्लेख कर यह प्रयास करें कि पेशियों के बीच बड़ा अंतराल न बने . उन्होंने कहा कि मामलों में ज्यादा समय लगने पर अपराधियों को गैरवाजिब मौका मिलता है और इससे पीडि़त पक्ष की परेशानियां बढ़ जाती है .

अपील समय पर की जाये
दोषमुक्ति के प्रकरणों में अपील की समीक्षा पर आई.जी.  विजय यादव का साफ कहना था कि इसमें प्रभारी अधिकारी का इंटेलीजेंट होना बहुत मायने रखता है . उन्होंने कहा कि अपील समय रहते और तथ्यात्मक रूप में की जाना चाहिए . उन्होंने कहा कि मात्र औपचारिक तरीके से की गई अपील के कोई मायने नहीं होते .

तंग हाथ से इनाम नहीं
बैठक में दोष सिद्धी के प्रकरणों में विवेचकों-अभियोजकों की भूमिका की भी समीक्षा की गई . इस दौरान कमिश्नर प्रवीण गर्ग ने कहा कि दोष सिद्धी में विवेचकों, अभियोजकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो अपराधी को उसके सही अंजाम तक पहुंचाती है . उन्होंने कहा कि दोषसिद्धी में कारगर भूमिका निभाने वाले विवेचकों-अभियोजकों को खुले हाथ से इनाम देकर नवाजा जाना चाहिए .

सतर्कता समिति की बैठक
अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण नियम के तहत गठित संभाग स्तरीय सतर्कता एवं सलाहकार समिति की बैठक भी आज कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई. बैठक में अनुकम्पा नियुक्ति, पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा, राहत प्रकरण साक्षियों का यात्रा भत्ता, पोषण आहार भत्ता, अन्तर्जातीय विवाह  प्रोत्साहन आदि पर चर्चा की गई . बैठक में अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित मामलों की समीक्षा की गई . सीहोर में एक,रायसेन में चार और विदिशा में 21 मामले लंबित पाए जाने पर कमिश्नर भोपाल संभाग श्री प्रवीण गर्ग ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे लंबित मामलों की गहन समीक्षा कर उन कारणों का पता लगाएं जिनके चलते मामले अटके हैं या उनका निराकरण नहीं हो सका है . उन्होंने निर्देश दिए कि अनुकम्पा नियुक्ति के मामलों का निराकरण शीघ्रता से किया जाना चाहिए.

बैठक में अधिनियम के तहत पुनर्वास की स्थिति पर जिलेवार चर्चा की गई . इस दौरान कमिश्नर प्रवीण गर्ग ने पीडि़त परिवारों के बच्चों को शिक्षा दिलाए जाने के खास निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह महत्वपूर्ण मुद्दा है जो अत्याचार की स्थिति को मिटाने में खास भूमिका निभा सकता है. उन्होंने सभी कलेक्टर्स को इस ओर ध्यान देने के निर्देश दिए. उन्होंने यह भी ताकीद की कि ऐसे बच्चों को हॉस्टल में दाखिला दिलाया जाना चाहिए. बैठक में आई.जी.भोपाल रेंज विजय यादव ने अत्याचार अधिनियम के तहत पंजीकृत अपराधों की समीक्षा के दौरान कहा कि इनमें होस्टाइल की स्थिति निर्मित होना बड़ा प्रश्न चिन्ह है. उन्होंने कहा कि मामलों की विवेचना पूरी गंभीरता से की जाये . सावधानीपूर्वक वे सभी तथ्य जुटाए जायें जो अपराधी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

बैठक में अधिनियम के तहत पीडि़तों और साक्षियों को यात्रा भत्ता तथा पोषण आहार भत्ता भुगतान की स्थिति पर चर्चा के दौरान बताया गया कि संभाग में अब तक 93 मामलों में 33 हजार 860 रूपये मजदूरी, 15 हजार 431 रूपये यात्रा भत्ता और पांच हजार 605 रूपये की राशि पोषण आहार भत्ता के रूप में पीडि़तों/साक्षियों को प्रदान की जा चुकी है .

विवादों के निपटारे की समीक्षा
बैठक में साम्प्रदायिक भूमि विवादों के निपटारे पर भी जिलावार चर्चा की गई .बैठक में धारा 145 के तहत न्यायालय में लंबित मामलों, विवाद की संभावना, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, बिना सक्षम अनुमति के धार्मिक स्थलों का निर्माण पर चर्चा की गई.बैठक में मिश्नर प्रवीण गर्ग ने कहा कि इन मामलों में सतर्कता बरती जाना जरूरी है . उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि इस सिलसिले में हाईकोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जायेगा . कलेक्टर्स यह देखें कि नई विवादास्पद स्थितियां निर्मित न हों . अतिक्रमणकर्ताओं को साफतौर पर समझा दिया जाना चाहिए कि माननीय न्यायालय क्या चाहता है.

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