भारत के गांवों तक स्टील का वितरण पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार एक नेटवर्क की योजना पर काम कर रही है. गांवों में भी लोहे की जरूरत पड़ती है और उसे पास के बड़े नगरों में ही प्राप्त किया जा सकता है. वजन की वजह से लोहा ढुलाई की लागत से काफी महंगा हो जाता है. दो केंद्रीय सरकार के उपक्रम (1) स्टील आथेरिटी आफ इंडिया (सेल) और (2) राष्ट्रीय इस्पात निगम (रिनल) इस दिशा में कार्य योजना बना रहे है कि भारत में स्टील का वितरण इतना व्यापक व विस्तारित कर दिया जाये कि वह हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाए.

आवागमन के साधनों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी लघु औद्योगिक इकाईयां स्थापित होने लगी है. ये कृषि व निर्माण कार्यों के लिए लोहे के औजारों का निर्माण करने लगे हैं. केंद्रीय स्पात मंत्री श्री बेनीप्रसाद वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों तक लोहा की आपूर्ति को पहुंचाना है. इससे देश में लोहे की खपत और औद्योगिक इकाईयो में भारी वृद्धि हो जायेगी. शहरों में जमीन की कमी व बढ़ी हुई कीमतों के कारण लोहे के सरिये बनाने वाली प्रोसेसिंग यूनिट गांवों की तरफ रूख कर रहे हैं. शहरी जमीनों पर इतना ज्यादा आबादी, आवास व औद्योगिक दबाव बढ़ गया है कि जमीन ही इस समय राष्टï्र निर्माण के क्षेत्र में सबसे बड़ी जरूरत बन गया है और इसकी ही सबसे ज्यादा कमी महसूस की जाने लगी है. दोनों सरकारी उपक्रम सेल और रिनल स्टील आपूर्ति के लिये ग्रामीण अंचलों में डीलर नेटवर्क कायम करने जा रहे हैं. श्री वर्मा ने बताया कि भारत सरकार के स्पात मंत्रालय ने हर घर तक स्टील पहुंचाने की नीति बनाई है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को दो ही धातुएं सोना व लोहा ही निर्धारित करती है. सोना अंतर्राष्ट्रीय मानक है तो लोहा किसी देश की आंतरिक आर्थिक दृढ़ता है.

सेल उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और जम्मू कश्मीर से कई स्टील प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर रही है. कई स्टील मिलें जो बंद पड़ी है उन्हें भी पुन: जीवित  कर उत्पादन में लगाया जा रहा है. सेल ने उत्तर प्रदेश में जगदीशपुर मालविका स्टील को पुन: चालू करने का काम शुरू कर दिया है. सेल की तरह रिनल भी अनेक राज्यों में स्टील प्रोसेसिंग यूनिट लगा रही है. स्टील के बढ़ते प्रयोग से गांवों में संरचना का विकास भी होने जा रहा है. अभी तक यह स्थिति चलती जा रही है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े स्टील प्लांट भिलाई, राऊरकेला, दुर्गापुर के अलावा देश का सर्वप्रथम टाटा का जमशेदपुर में स्टील प्लांट के साथ साथ कई निजी स्टील प्लान्ट कार्य कर रहे हैं. इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में बेलाडीला और कर्नाटक में बैल्लारी की लोहे अयस्क खदानों में लोहा अयस्क का निर्यात भी ज्यादा हो रहा है और देश में इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. इसलिए यह महसूस किया जा रहा है कि देश में ही स्टील की मांग इतनी बढ़ती जा रही है कि लोह अयस्क निर्यात करना संपत्ति का ही निर्यात होता जा रहा है. ट्रक, ट्रेक्टर, कार, बाइक स्कूटर आदि वाहनों ने देश में स्टील की जरूरत को काफी बढ़ा दिया है. लोहे में आत्मर्निभर होना भारत के विकास की अनिवार्यता है. अब इसका खनन, दोहन, निर्यात-आयात व निर्माण सभी पर नियंत्रण होना चाहिए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
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