खाद्यान्न व अन्य फसलों के निर्यात को लेकर केन्द्र सरकार में विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है. मंत्रालयों में आपसी द्वंद्व हो जाता है और एक-दूसरे की आलोचना करने लगते हैं. एक मंत्रालय निर्यात रोकता है तो दूसरा मंत्रालय उसे खुलवाता है और यह दोनों काम कुछ ही दिनों में हो जाते हैं. सरकार पृथक मंत्रालयों के आधार पर नहीं चलती है- उसकी कार्यप्रणाली सामूहिक निर्णय और सामूहिक जिम्मेदारी की होती है.

यह बात भी कही जा रही है कि देश में खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हो रही है. साथ में यह भी कहा जा रहा है कि आबादी बढऩे से खपत भी उत्पादन वृद्धि से ज्यादा है इसलिये जहां उत्पादन बढ़ाना जरूरी है वहीं आबादी को बढऩे से रोकना और घटाना भी उतना ही या उससे ज्यादा जरूरी है. हैरानी इस बात से भी होती है कि साथ यह कहा और किया जा रहा है कि उत्पादन ज्यादा हो गया है इसलिए गेहूं, चावल, शक्कर, प्याज, कपास का निर्यात किया जाना चाहिए.

दशहरा-दिवाली त्यौहारों के आने से पहले भाव स्थिर रखने और त्यौहारों पर आपूर्ति बनाये रखने के लिये शक्कर के निर्यात पर खाद्य मंत्री श्री थोमस ने रोक लगा दी. कृषि मंत्री श्री शरद पवार ने तर्क दिया कि विदेशों में शक्कर व प्याज के भाव ऊंचे चल रहे हैं इसलिए इनका निर्यात खोला जाए और निर्यात खुल गया. देश की कपड़ा मिलों को कपास की आपूर्ति बनी रहे इसलिये इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाया. फिर श्री शरद पवार मैदान में आ गये कि अन्तरराष्टï्रीय बाजार में कपास के भाव ऊंचे हैं और निर्यात खुलवा लिया. इस तरह का मंत्रालयों में विरोधाभास सर्वथा अनुचित है और होना नहीं चाहिए.

इन दिनों शक्कर व प्याज का निर्यात किया जा रहा है जबकि गर्मी के दिनों में शक्कर व प्याज की खपत में काफी तेजी हो जाती है. इनके भाव बढऩे लगे हैं, चीनी जून तक निर्यात की जायेगी. इस बार गन्ने की बम्पर फसल के आसार बन गये हैं. भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है. एक साल पहले 186 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था. यह मौजूदा वर्ष में 14 प्रतिशत बढ़कर 212 लाख टन हो गया है. प्याज किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार ने उसका न्यूनतम निर्यात मूल्य घटा दिया है. इससे प्याज का निर्यात लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गया है. इस समय प्याज का निर्यात मूल्य 125 डालर प्रति टन है. इस समय देश में भी प्याज के दाम बढऩा शुरू हो गये हैं. भारत ने गत 2011-12 वर्ष में 300 अरब डालर से अधिक का निर्यात व्यापार किया. इंजीनियरिंग का सामान आभूषण, कपड़े, रासायनिक व दवाई उद्योग क्षेत्र ने अच्छा निर्यात जारी रखा. जबकि इस वर्ष अवधि में कुछ आयात 485 अरब डालर का हो गया. ऐसा मुख्यतया पेट्रो क्रूड की कीमतों में वृद्धि से हुआ है. इनका आयात 150 अरब डालर का रहा. इससे आयात निर्यात में 185 अरब डालर का अंतर होने से व्यापार में असंतुलन हो गया.
भारत निर्यात व्यापार में राजनैतिक दृष्टिï से भी पाकिस्तान के साथ कपड़ों के बाजार में रुख बदल रहा है. वह पाकिस्तान से प्रत्यक्ष रूप से कपड़ों का आयात करेगा. इससे पहले पाकिस्तान सिंगापुर व दुबई के जरिए भारत में कपड़ों का निर्यात करता था. दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिये पाकिस्तान के बड़े ब्रांड भारत में निवेश करके रिटेल क्षेत्र में अपनी दुकानें खोलेंगे. दोनों देश व्यापार को बढ़ाकर अपने संबंधों को बढ़ाने को सहमत है.

 

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