मानसून की बेरुखी से महंगाई सातवें आसमान पर

राष्ट्रपति चुनाव के बाद हो सकती है घोषणा

नई दिल्ली, 12 जुलाई. पेट्रोल के बाद केंद्र सरकार अब डीजल के दाम में वृद्धि करने जा रही है. सरकार ने इसके लिए अपना मन बना लिया है लेकिन 19 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होने के बाद ही इसे अमली जामा पहनाया जाएगा. तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि मूल्यवृद्धि को टाला नहीं जा सकता, अब बस तारीख और समय का इंतजार है.

डीजल की कीमतें पिछले साल 25 जून के बाद से नहीं बढ़ी हैं और सरकारी तेल कंपनियों को प्रति लीटर डीजल पर 10 रुपये 33 पैसे का नुकसान हो रहा है. जून 2010 में एक उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रिमंडलीय पैनल ने सैद्धांतिक तौर पर इस बात पर सहमति जताई थी कि पेट्रोल की तरह डीजल भी सरकार से नियंत्रण से बाहर कर देना चाहिए. डीजल की कीमतों पर विचार करने के लिए अधिकृत मंत्रियों के समूह की बैठक 25 जून 2011 से नहीं हुई है. पहले इसकी अध्यक्षता निवर्तमान वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करते थे लेकिन राष्ट्रपति की रेस में शामिल होने के चलते उनके इस्तीफे के बाद अभी तक किसी को उनकी जगह नियुक्त नहीं किया गया है. इस समूह में टीएमसी, डीएमके जैसे यूपीए सहयोगियों के सदस्य भी शामिल हैं.

मई की वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत

पूंजीगत वस्तु तथा खनन क्षेत्र में गिरावट के साथ विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण इस साल मई महीने में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर धीमी होकर केवल 2.4 प्रतिशत रही. इस नरमी के मद्देनजर रिजर्व बैंक 31 जुलाई को मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा करते समय कर्ज सस्ता करने के कदम उठा सकता है. यहां आज जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकां

क पर आधारित औद्योगिक वृद्धि दर पिछले वर्ष मई महीने में 6.2 प्रतिशत रही. इस बीच, अप्रैल के आज जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार, उस माह औद्यौगिक उत्पादन में 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि प्रारंभिक आंकड़ों में माह के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दिखायी गई थी.

चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने अप्रैल-मई के दौरान औद्योगिक वृद्धि 0.8 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व महीने में 5.7 प्रतिशत थी. आंकड़ों के अनुसार पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन मई महीने में 7.7 प्रतिशत की गिरावट आयी जबकि पिछले वर्ष के इसी महीने में इसमें 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी. खनन उत्पादन में भी 0.9 प्रतिशत की गिरावट आयी जबकि पिछले वर्ष के इसी महीने में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. सूचकांक में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला विनिर्माण क्षेत्र का भी प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और इसमें आलोच्य महीने के दौरान महज 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि मई 2011 में इसमें 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी. औद्योगिक उत्पादन में नरमी को देखते हुए ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक जब 31 जुलाई को मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा पेश करेगा तो उस पर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती को लेकर दबाव होगा.

एक हफ्ते में दोगुनी हो गई सब्जियों की कीमतें

खराब मानसून के चलते पहले से ही सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं.  वर्तमान में दिल्ली में आलू 20 रुपये, टमाटर 40 रुपये, भिंडी 80 रुपये और बींस 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर मिल रहे हैं. पिछले 1 हफ्ते में सब्जियों के दाम 50 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है. डीजल में इजाफे के बाद इन सब्जियों की कीमतें 30 फीसदी से ज्यादा बढऩे की उम्मीद है.  सामान्य से कम बारिश होने का असर मोटे अनाजों मसलन ज्वार, बाजरा और मक्का के उत्पादन पर पडऩे की आशंका है.

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