भोपाल, 17 मई. तुलसीदास जी के अनुरूप परमेश्वर एक है वह आजन्मा, सच्चिदानंद और परम धाम है. व्यापक तथा विश्व स्वरूप है उन्हीं भगवान ने दिव्य शरीर धारण कर राम के रूप में नाना प्रकार की लीलाएं की है.

आनन-कानन प्रसंग में शाश्वत महाराज ने नवीन नगर में उसी आजन्मों, विश्व स्वरूप धारी ईश्वर के विभिन्न अवतारों की कथा आज सनाई. हरि अनंत हरि कथा अनंता कि मानस की उक्ति आज के कथा प्रसंग में चरितार्थ हो गई. उन्होंने कहा कि ब्रम्ह, विष्णु और महेश हमारे तीनों देवों को शीतलता सुहाती है. विष्णु जी क्षीरसागर में निवास करते है, ब्रम्ह जी कमल के पुष्प पर विराजित है और भगवान शिव कैलाश पर्वत पर बर्फ के बीच निवासरत है अर्थात तीनों देव शीतलता को अंगीकार किये है,

स्वीकार किये है और हमारे हृदय में पापाचार और अनाचार की अग्रि जल रहा है तो भला शीतलता के पुजारी हमारे हृदय में क्यों निवास करेंगे? अतएव हमें हृदय की इस पापाचार अनाचार और वासना की अग्रि को बुझाना होगा तब ही भगवान का हमसे साक्षात्कार हो सकेगा.
कथा में निरंतर महिलाओं और प्रबुद्घ बुजर्ग वर्ग की भीड़ तो बढ़ रही है साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जनता भगवान श्रीराम की कथा का रसास्वदान करने निरंतर कथा स्थल पर उमड़ रही है. आयोजको में से संयोजक मनोहरलाल मैथिल एवं प्रेस प्रतिनिधि मोहन सिंह  ठाकु र द्वारा बताया गया कि कल भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग है.

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