कुछ समय पूर्व सीहोर जिले में एक किसान ने कर्ज से तंग आकर आत्महत्या कर ली और अब खबर आ गई कि रायसेन जिले में एक किसान समर्थन मूल्य की तुलाई में हो रही धांधलियों से त्रस्त होकर आत्महत्या कर ली. उस वक्त कहा गया कि मरने वाला विक्षिप्त अवस्था का किसान था और अब कहा जा रहा है संभवत: यह विषाक्त भोजन करने से हुई मौत है. मेडिकल जांच हो रही है. इसमें वजह जो भी रही हो लेकिन एक वजह तो स्पष्टï है कि गेहूं खरीदी में सब कुछ उलटपुलट है.

खरीदी से पहले यह दावा किया गया कि शासन ने एडवांस में ही सभी प्रकार की तैयारियां क ली हैं. भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है और निजी क्षेत्र से भी गोदामों के अनुबंध हो गये हैं. खरीदी केंद्रों से परिवहन व्यवस्था भी कर ली गई है, लेकिन जब खरीदी शुरू हुई तो कुछ दिनों में तमाम कमियां सामने आ गईं. बोरों की इतनी कमी हो गई कि तुलाई रोकनी पड़ी. जहां भी थोड़े बहुत पहुंचे उन्हें किसानों ने लूट लिया. कुछ पर केंद्र के कर्मचारियों ने रिश्वत व दलाली लेना शुरू कर दी. व्यापारियों ने अपना पुराना गेहूं किसानों के नाम से नये समर्थन मूल्य पर बेच डाला. माल पकड़ा भी गया. मानसून पूर्व वर्षा जो साधारण होती है, लेकिन उससे खुले में पड़ा गेहूं का स्टाक भारी मात्रा में नष्ट हो गया.

राज्य में एक अर्से से मंडी बोर्ड, मंडी संचालनालय बना हुआ है. मंडी टेक्स से भारी रकम की आय होती है. इससे हर मंडी का इतना विकास हो सकता था. कि वहां खरीदी केंद्र की तुलाई, परिवहन व भंडारण वहीं हो सकता है. इल्जाम यह है कि मंडी टेक्स की रकम में जिला स्तर पर ही अधिकारी व नेता लोग भारी अफरातफरी कर देते हैं. मंडी का रखरखाव इतना खराब है कि लगभग सभी मंडियां स्तरहीन बन चुकी हैं. मंडियों को इसी उद्देश्य से बनाया गया है कि वे किसान विकास केंद्र के रूप में विकसित हो सके. खाद्यान्न उर्जाजन के काम में मंडियां बिल्कुल बेकार साबित हो रही हैं.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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