नौ जिलों में महिला अपराधों के लिए होगा फास्टट्रेक कोर्ट

हर जिले में अब पदस्थ होंगी महिला अधिकारी

जांच के लिए कहीं से भी भेजी जाएगी महिला अधिकारी
Mahila Policeभोपाल,14 जनवरी,नभासं.प्रदेश में जिन जिलों में महिलाओं से संबंधित अपराध की तादाद ज्यादा है या वहां सौ से अधिक महिला संबंधी अपराध लंबित हैं. उन जिलों में जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाएगी. इस प्रकार के जिलों की संख्या करीब नौ है. मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ विगत तीन जनवरी को हुई बैठक में महिला अपराधों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे.

सरकार ने अब ये तय किया है कि लोक अभियोजकों और सरकारी वकीलों के रिक्त पद जल्द से जल्द भरे जाएंगे.इसके अलावा भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रायसेन, सतना, रीवा, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़ और बैतूल में जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही समय सीमा में जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में उसका चालान जल्द ही पेश किया जाएगा इस संबंध में जल्द ही मुख्य सचिव बैठक लेने वाले हैं,जिसमें अब तक के निर्णयों पर अमल के संबंध में चर्चा कि जाएगी.

महिला अधिकारी पदस्थ होंगी फील्ड में
एएसपी और डीएसपी स्तर की महिला अधिकारियों को जल्द ही फील्ड में पदस्थ किया जाएगा. पुलिस मुख्यालय में इसकी कवायद शुरू की गई है. सूत्र बताते हैं कि गृहमंत्री ने महिला अधिकारियों की सूची तलब की है.जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने महिला अधिकारियों की सूची तैयार की है. एएसपी और डीएसपी स्तर की 48 महिला अधिकारियों का नाम सूची में हैं. वर्षो से एक स्थान पर पदस्थ महिलाओं को बदला जाएगा. बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक महिला अधिकारियों को जिलों में भेजने संबंधी आदेश जारी कर दिए जाएंगे.

गृहमंत्री की इच्छा सभी जिलों में डीएसपी स्तर की महिला अधिकारियों की पदस्थापना करने की है. एएसपी स्तर की अधिकारियों को संभागीय सेल बनाकर पदस्थ किए जाने की चर्चा है. फील्ड में पदस्थापना करने संबंधी जानकारी मिलने के बाद कुछ महिला अधिकारियों ने डीजीपी नंदन दुबे से मुलाकात कर अपनी पारिवारिक परेशानियों का हवाला देते हुए भोपाल में पदस्थ किए जाने का आग्रह किया है. महिला अधिकारियों का कहना है इससे उनका परिवार अलग-अलग हो जाएगा और बच्चों को परेशानी होगी. सूत्रों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय भी इस पक्ष में है कि बलात्कार मामले की जांच महिला अधिकारी द्वारा की जाए. चाहे कहीं से अधिकारी भेजा जाए. इसके लिए जिले में पदस्थापना जरूरी नहीं है.

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