नई दिल्ली, 29 नवंबर. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रिटेल सेक्टर में विदेशी निवेश के फैसले का जमकर बचाव किया है. युवक कांग्रेस के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि रिटेल सेक्टर में एफडीआई का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है. उन्होंने एफडीआई के फैसले को देशहित में बताते हुए कहा कि इससे किसानों को उचित दाम मिलेंगे.

इससे छोटे-बड़े कारोबारियों को भी फायदा होगा और रोजगार भी बढ़ेगा.  एफडीआई के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध देश के साथ विश्वासघात है.  जो भी मतभेद हैं उनपर संसद में चर्चा होनी चाहिए.  रिटेल में कई शर्ते लगाई गई हैं. जहां तक राज्य सरकारों की बात है तो इस वे फैसला लेने के लिए वे स्वतंत्र हैं. महंगाई का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल की कीमतों के कारण महंगाई बढ़ी. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए लोकपाल लाएगी.

राहुल के आने से मजबूत हुआ संगठन
प्रधानमंत्री ने युवक कांग्रेस को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है बताते हुए कहा कि इससे कांग्रेस को मजबूती मिली है. राहुल गांधी के आने से युवक कांग्रेस और कांग्रेस मजबूत हुए हैं.

प्लेग जैसा है भ्रष्टाचार

बीमारी से उबरने के बाद पहली बार सार्वजनिक सभा में शामिल सोनिया गांधी ने युवाओं से भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होने की अपील की. सोनिया ने भ्रष्टाचार की तुलना प्लेग से करते हुए कहा कि सूपीए इसे जड़ से मिटाने के लिए प्रयासरत है. गांधी ने आरटीआई और लोकपाल बिल जैसी कोशिशों को इस दिशा में सार्थक कदम करार दिया. सोनिया ने राजनीतिक व्यवस्था के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था और चुनाव प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने अधिवेशन में पहुंचे युवाओं को गांव-गांव जाकर गरीबों और पिछड़ों के दुख-दर्द समझने और उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित किया.

एफडीआई वापस ले : विपक्ष
कांग्रेस और एनसीपी छोड़ सभी दलों ने एक स्वर में कहा है कि जब तक सरकार रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का अपना हाल का फैसला वापस नहीं लेती तब तक संसद में कामकाज नहीं होने दिया जाएगा और इस गतिरोध के लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. सरकार की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य एवं केन्द्रीय मंत्री सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इस निर्णय को वापस लिए जाने की मांग करते हुए कहा कि इसके लिए कोई बहस की भी जरूरत नहीं है.

सरकार जिम्मेदार : माकपा-प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर संसद में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए आज सरकार की ओर से आहूत बैठक के बाद माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि बैठक में कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका और उनकी पार्टी ने सरकार से साफ कह दिया कि सरकार के इस निर्णय के वापस लेने के बाद ही संसद सुचारु रूप से चल सकेगी और इस दौरान संसद का कामकाज ठप रहने के लिए सरकार ही जिम्मेदार है.

सरकार की मंशा नहीं : भाजपा
भाजपा के ही प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जिस बैठक में प्रधानमंत्री ही नहीं आए, उसमें क्या कोई नतीजा निकल सकता है. उन्होंने कहा, ‘सरकार की मंशा ही नहीं है कि सरकार चले.

सत्र को दौरान विवादस्पद विषय क्यों : सपा
सपा प्रवक्ता मोहन सिंह ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि सरकार समझौते के मूड में है क्योंकि सरकार ऐसे विवादास्पद विषय को कम से कम संसद के दौरान तो टाल ही सकती थी लेकिन उसने पूरे देश और विपक्ष को चुनौती देते हुए यह निर्णय किया.

बैठक बेनतीजा नहीं : शुक्ला
विपक्षी दलों के इस बैठक को बेनतीजा बताए जाने के विपरीत संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ला ने दावा किया है कि इसे बिल्कुल बेनतीजा कहना गलत है. उन्होंने कहा, ‘यह कहना ठीक नहीं है कि बैठक बिल्कुल बेनतीजा रही. यह बैठक सभी दलों की राय जानने के लिए आहूत की गई थी. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बैठक में सभी दलों के विचार सुने और वे अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इससे अवगत कराएंगे. यही लोकतंत्र का हिस्सा है.

Related Posts: