नीला, रमोला और रीना इन सभी महिलाओं में एक चीज समान है, वे सभी इस बात का कारण नहीं जानती थी कि उनके जीवन में इतने बदलाव क्यों आ रहे थे. वे इतनी अलग भावनाओं को क्यों महसूस कर रहीं थीं. उनमें आत्म घृणा की भावनायें क्यों पैदा हो रही थीं.

उनके मिजाज में कुछ परिवर्तन क्यों आ रहे थे. दरअसल ये सभी महिलाएं मीनोपॉज से गुजर रही हैं, लेकिन इसके असर से बहुत अधिक वाकिफ नहीं हैं.मेट्रो सिटीज में मल्टी-नेशनल कोरपोरेट कल्चर का पर्याय बन चुका है.
यहां की जीवन शैली प्रेशर कुकर की तरह है. काम करने वाली महिलाओं की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है. मीनोपॉज से अनजान महिलाएं पारिवारिक जिंदगी और कामकाज में तालमेल नहीं बैठा पा रही हैं.

गुडग़ांव ने महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अपनी तरह का पहला मीनोपॉज क्लीनिक खोला है. क्लीनिक की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रागिनी अग्रवाल के मुताबिक महिलाओं को मीनोपॉज से डरना नहीं चाहिए, बल्कि इसे एक संक्रामक अवस्था के रूप में स्वीकार करना चाहिए.

यह महिलाओं के जीवन में होने वाला एक अनिवार्य परिवर्तन है. इसके अप्रिय लक्षणों का सामना करने के लिए महिलाओं में जागरूकता, तैयारी और सहयोग की आवश्यकता होती है.

मीनोपॉज में आता है हार्मोन में बदलाव

मीनोपॉज को आज के परिप्रेक्ष्य में काफी महत्व दिया जाता है. विशेष रूप से महानगरीय व शहरी माहौल में जहां महिलाएं न केवल गृहिणियां हैं बल्कि हाई प्रोफाइल पेशेवर भी हैं. इससे उन पर परिवार की जि़म्मेदारी बढ़ जाती है, उन्हें अपने किशोर बच्चों की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखना होता, उनका पेशेवर जीवन भी उनसे काफी अपेक्षायें रखता है.

उन्हें अपने सहकर्मियों और कार्यालय के प्रति सभी जिम्मेदारियों को निभाना होता है. और अचानक उनमें हॉर्मोनों में बदलाव आने लगता है, उनमें पेरीमीनोपॉज के लक्षणों की शुरुआत होने लगती है. वास्तव में भारत में जहां जीवन की प्रत्याशा 23.96 से बढ़कर 80 वर्ष हो गई है. इसके परिणामस्वरूप मीनोपॉज के बाद की अवधि लगभग 25 से 30 साल की होती है.

शरीर व मूड में आने लगता है परिवर्तन

जिन परिवारों में महिलायें मीनोपॉज़ की अवस्था से गुजऱ रहीं हैं, वहां महिलाओं में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों और उनके मूड में होने वाले बदलाव को समझा जाना चाहिए.
वे जिस परेशानी का सामना कर रहीं हैं, उस में उनका सहयोग किया जाना चाहिए. मीनोपॉज एक ऐसी अवस्था है जिससे हर महिला गुजऱती है. मीनोपॉज की इस लम्बी प्रक्रिया के दौरान उसे परिवार, मित्रों के भावनात्मक सहयोग के साथ चिकित्सकीय सहायता की भी आवश्यकता होती है.

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