इंदौर/ मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों से, 23 अक्टूबर. दीपावली के पांच दिवसीय जगमग पर्व की शुरूआत धनतेरस से होगी.  धनतेरस पर्व जहां एक ओर आस्था से जुड़ा है और देवताओं के वैद्य धनवन्तरि से लोग बेहतर स्वास्थ्य की कामना करेंगे, वहीं इस एक दिन में शगुन के चलते करोड़ों रुपए का कारोबार भी होगा है. इसके लिए बाजार सजकर तैयार हैं.  इस दिन लोग सोना, चांदी या बर्तन जरूर खरीदते हैं. धारणा है कि नया ‘धन’ या बहुमूल्य धातु शगुन और भाग्य का प्रतीक होती है. धनतेरस के दिन धातु खरीदना शुभ माना जाता है. इसीलिए लोग इस दिन सोना, चांदी या बर्तन खरीदते हैं. ज्यादातर मांग चांदी के सिक्कों की होती है. सिक्के अधिक महंगे भी नहीं होते और धनतेरस पर धातु की खरीद का शगुन भी हो जाता है.

संपन्न वर्ग के लोग सोने के सिक्के, गहने या फिर चांदी के लक्ष्मी गणोश जरूर खरीदते हैं. इसी लक्ष्मी गणोश की दीपावली के दिन पूजा की जाती है.धनतेरस के दिन सुबह पूरे घर की सफाई करने के बाद द्वार पर रंगोली सजाई जाती है. यह रंगोली चावल के आटे से बनाई जाती है. इसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाई जाती है.गांवों में पशुओं को इस दिन खूब सजाया जाता है क्योंकि किसान इन पशुओं को अपनी आय का सोत मानते हैं. दक्षिण भारत में धनतेरस के दिन गायों की विशेष पूजा की जाती है क्योंकि उन्हें लक्ष्मी का अवतार माना जाता है.

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