बचाव के इंतजाम न किए तो दंत रोग में हो सकता है इजाफा

नयी दिल्ली, 18 जनवरी. केंद्र सरकार और राज्य सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी मध्यप्रदेश सहित देश के राज्यों के पेय जलों में फ्लोराईड, नाईट्रेट और लवणता की मात्रा अधिकाधिक देखने को मिल रही है. हालांकि इससे किसी प्रकार की जानलेवा बीमारियों की संभावना नहीं दिखती, लेकिन यदि बचाव का इंतजाम नहीं किया तो दांत संबंधित रोगों से लोगों को दो-चार होना पड़ सकता है.

यह किसी निजी सर्वे की रिपोर्ट नहीं है बल्कि जलसंसाधन मंत्रालय के आंकड़ें है.  पानी में फ्लोराईड मात्रा पर काबू नहीं किया जा सका है. अकेले मध्यप्रदेश के 2651 निवास स्थानों पर फ्लोराइड की मात्रा देखने को मिली है जबकि 261 स्थानों पर लवणता अधिक देखने को मिली है. ऐसे में पेयजलों की खतरनाक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. मध्यप्रदेश जैसे हालात बिहार और कर्नाटक में भी है लेकिन राजस्थान में इसकी भयावहता अधिक देखने को मिलती है. राजस्थान में फ्लोराइड की मात्रा 10 हजार से अधिक स्थानों पर पाई गई है. जबकि 20 हजार से अधिक स्थानों पर नाईट्रेट की मात्रा अधिक पाई गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लोराईड बढऩे से फ्लोरोसिस संबंधित बीमारी आमतौर पर हो जाती है. जिससे दांत संबंधी कई बीमारी एक साथ जन्म ले सकती है. दांतों के रंग में परिवर्तन हो जाता है. इस रिपोर्ट के आने के बाद केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों को निर्देश जारी किए है कि संबंधित क्षेत्रों में विशेष सर्तकता बरतने की जरूरत है. फ्लोराईड, नाईट्रेट और लवणत कम करने के लिए कई उपाय सुझाये गए हैं.

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