अभी तक समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीदने में व्यवस्था के नाम पर केवल कुव्यवस्था ही देखने में आ रही है. किसान कई दिनों तक तुलाई के लिए खरीद केंद्र में पड़े रहते हैं. इसमें रिश्वत भी चलती थी और दूसरे राज्यों के किसान व व्यापारी वर्ग अपना पुराना स्टाक बेच जाते थे. खरीद केंद्रों में परिवहन न हो सकने के कारण खरीदी रोक भी दी जाती थी व वारदानों का भी अभाव हो जाता है. भंडारण की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. इसके अभाव में खाद्यान्न की बर्बादी भी बहुत हो गई.

राज्य सरकार ने इन सभी समस्याओं का एक मुश्त इलाज खोजा है. सूचना तकनीक का प्रयोग कर इस कुव्यवस्था को व्यवस्थित किया गया है. 2 अक्टूबर गांधी जयंती से पूरे प्रदेश में समर्थन मूल्य पर अनाज बेचने वाले किसानों का आन लाइन पंजीयन का काम शुरू कर दिया गया है. राज्य में 4000 ऐसे केंद्र खोले गये हैं जिनके नोडल अधिकारी जिलों के खाद्य नियंत्रकों को बनाया गया है. यहां किसानों का अग्रिम पंजीयन हो जायेगा और उन्हें किस दिन खाद्यान्न लेकर केंद्रों पर पहुंचना है यह काफी पहले मोबाइल फोन पर सूचित कर दिया जायेगा. इससे यह सुनिश्चित हो जायेगा कि राज्य के किसान से ही उसकी फसल खरीदी गई है. इससे दूसरे राज्यों के किसान व खाद्यान्न के व्यापारी अपना माल नहीं बेच पायेंगे.

इस अग्रिम पंजीयन से शासन को पहले से ही विदित हो सकेगा कि किस केंद्र पर कितना खाद्यान्न आ रहा है और उसके केंद्र में रखने, परिवहन की व्यवस्था कर भंडार गृह तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकेगी. इसके लिए भुगतान की व्यवस्था में भी बड़ी सहूलियत हो सकेगी और वह भी अग्रिम रूप से ज्ञात रहेगा.

शासन को इस बात के लिये भी विचार करना चाहिए कि उपार्जन खरीदी केंद्रों को स्थाई रूप दे दिया जाये. जहां से खरीदी समाप्ति के बाद उन्हें कृषि सेवा केंद्र (एग्रो सर्विस सेंटर) की तरह चलाया जा सके. जहां हमेशा खाद, बीज, कीटनाशक और सभी किसानी सुविधा वहां स्थाई तौर पर की जा सके. ये केंद्र नागरिक आपूर्ति निगम, बीज निगम, भंडार गृह निगम, सहकारी समितियां,  सहकारी बैंकों आदि का कार्य एक ही स्थान पर सामूहिक हित में संचालित किये जायेंगे. इन्हें कृषि कार्य का नोडल कार्यालय बनाया जाए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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