नयी दिल्ली, 23 सितम्बर. मल्टी ब्रांड खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और डीजल के मूल्य में बढोतरी के हाल के फैसले को लेकर विपक्षी दलों की आलोचनाओं का शिकार बन रही केंद्र सरकार आम आदमी को रिझाने के लिए  खाद्य सुरक्षा विधेयक को ट्रम्प कार्ड की तरह इस्तेमाल करने को तैयार है.

खुर्शीद ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल खाद्य सुरक्षा विधेयक को अंतिम रूप देने में जुटा है. मंत्रिमंडल मसौदा विधेयक को अंतिम रूप देने में जुटा है. इस कानून के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि देश में कोई भी भूखा न रहे. कोई व्यक्ति भूखा न सोए और लोगों को कम कीमत पर अच्छा खाद्यान्न मिले. देश की 70 प्रतिशत आबादी इस कानून के दायरे में आएगी. तब हम देखना चाहेंगे कि कौन सी पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है.
यह पूछे जाने पर कि क्या खाद्य सुरक्षा विधेयक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पहले कार्यकाल में लाए गए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की तरह ही विपक्षी दलों को 2014 के आम चुनावों में चारों खाने चित्त करने के लिए राजनीतिक दांव की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. श्री खुर्शीद ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल को चुनाव से पहले अपनी उपलब्धियां गिनाने का अधिकार है. कु

छ दल अवरोध पैदा करने में विश्वास रखते हैं जबकि हम अपने अच्छे कार्यों की जानकारी आम जनता को देने में विश्वास करते हैं. श्री खुर्शीद ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) को शहरों तक बढाया जाएगा. इसे मध्यम वर्ग के लोगों के बीच उपजे असंतोष को समाप्त करने का जरिया समझा जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार संसद में भूमि अधिग्रहण विधेयक पेश करेगी. सिंगुर मुद्दे पर यह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी एजेंडा है. उन्होंने सवाल किया क्या वह इस विधेयक का विरोध करेंगी. हमें पूरा विश्वास है कि समाजवादी पार्टी और अन्य घटक दल इस विधेयक का समर्थन करेंगे, इसलिए संसद में संख्या बल की कोई चिंता सरकार को नहीं है.

एफडीआई से किराना कारोबार को खतरा नहीं : मोंटेक

खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति से उपजी आशंकाओं को दूर करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने रविवार को कहा कि मौजूदा खुदरा कारोबार का आने वाले समय में और विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि खुदरा कारोबार शीघ्र ही दोगुना हो जाएगा।  अहलूवालिया ने कहा, मुझे नहीं लगता कि खुदरा कारोबार में एफडीआई के आने से छोटी दुकानें समाप्त हो जाएंगी। एफडीआई के आने से छोटे कारोबारी बर्बाद हो जाएंगे, उनकी सोच गलत है। यह पूछे जाने पर कि वर्ष 02 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे, उस समय उन्होंने इन सुधारों का विरोध किया था।

इस पर अहलूवालिया ने कहा, मुझे यह याद नहीं रहता कि प्रत्येक आदमी प्रत्येक दिन क्या कहता है। चीजें आगे बढ़ चुकी हैं, नजरिया और परिस्थितियां बदल जाती हैं। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि एफडीआई को लेकर किसी प्रकार की स्पष्टता का अभाव है। उस समय भारतीय जनता पार्टी आर्थिक सुधारों के पक्ष में थी।

Related Posts: