भोपाल, 23 मार्च. वित्त मंत्री राघवजी ने विधायक चम्पालाल देवड़ा द्वारा विधानसभा में पूछे एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मध्यप्रदेश पेंशनर्स एसोसिएशन तथा अन्य पेंशनर्स संगठनों से 1 जनवरी 2011 से अब तक प्राप्त ज्ञापनों पर कार्यवाही की गई है.

पेंशनर कल्याण मंडल का गठन पेंशनरों की समस्याओं पर सतत्ï विचार कर राज्य शासन को सलाह देना, प्रक्रिया संबंधी विसंगतियों एवं कठिनाईयों को शासन की जानकारी में लाने और उनके निवारण के उपाय सुझाने के उद्देश्य से किया गया है, जिला पेंशन फोरम का गठन कलेक्टरों को पुराने पेंशन प्रकरणों को ज्ञात करने/सुलझाने एवं पेंशनरों की कल्याणकारी गतिविधियों में सहायता करने के उद्देश्य से किया गया है ताकि पेंशनरों की समस्याओं एवं कठिनाईयों का तुरंत निराकरण हो सके.

उन्होंने बताया कि वित्त विभाग द्वारा पेंशन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिये प्रत्येक जिला स्तर पर आयुक्त पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा के प्रशासकीय नियंत्रण में जिला पेंशन कार्यालय का गठन किया गया है. जिला पेंशन कार्यालय द्वारा 1-1-2011 से कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. लंबित प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किये जाने हेतु वित्त विभाग द्वारा शासन के समस्त विभागों को लंबित पेंशन प्रकरणों की जानकारी प्राप्त कर शासन स्तर पर विभागवार समीक्षा किये जाने के लिये पत्र जारी किया गया है.

बाल श्रम अधिनियम का क्रियान्वयन जारी
श्रम मंत्री जगन्नाथ ङ्क्षसह ने विधायक सुदर्शन गुप्ता द्वारा विधानसभा में पूछे गये प्रश्र के उत्तर में बताया कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत 16 व्यवसायों एवं 65 प्रक्रियाओं में बाल श्रमिकों का नियोजन प्रतिबंधित है जिनमें औद्योगिक संस्थान भी सम्मिलित हैं.

उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत बाल श्रमिकों का नियोजन होटलों में भी प्रतिबंधित है. प्रदेश में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत प्रतिबंधित व्यवसाय एवं प्रक्रियाओं में बाल श्रमिकों के नियोजनों की जांच हेतु निरीक्ष्ण कार्यवाही की जाती है. वर्ष 2011-12 में प्रतिबंधित नियोजनों में 41 बाल श्रमिकों को नियोजित पाया गया.

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