भोपाल की शासकीय यूनानी फार्मेसी को किया जायेगा मजबूत

भोपाल,11 अप्रैल,मध्यप्रदेश के भोपाल, उज्जैन, रीवा और ग्वालियर स्थित आयुर्वेद कॉलेजों तथा भोपाल स्थित होम्योपैथी कॉलेज में पी.जी. कोर्स शुरू करने की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं. इसके लिये आवश्यक व्यवस्थाएँ की जा रही हैं.

आयुष राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने आज यहाँ इस कार्य की प्रगति सहित प्रदेश के आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कॉलेज में चल रहे और शुरू किये जाने वाले कार्यों की समीक्षा की. बैठक में प्रमुख सचिव आयुष सुदेश कुमार, आयुष आयुक्त खण्डेलवाल तथा सभी कॉलेज के प्राचार्य उपस्थित थे. मंत्री हार्डिया ने प्रत्येक कॉलेज के कार्यों और आवश्यकताओं की अलग-अलग समीक्षा की. उन्होंने प्राचार्यों से और अधिक सुधार के संबंध में सुझाव भी प्राप्त किये. उन्होंने निर्देश दिये कि पदोन्नतियों के लिये डी.पी.सी. शीघ्र की जाये. उन्होंने कहा कि सभी आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी कॉलेजों में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये.

उन्होंने पारम्परिक देशज चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा और संरक्षण देने के लिये विशेष प्रयास के निर्देश दिये. हार्डिया ने इंदौर आयुर्वेद कॉलेज में पी.जी. कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा. यूनानी कॉलेज भोपाल की समीक्षा के दौरान मंत्री हार्डिया ने कहा कि शासकीय यूनानी फार्मेसी को सुदृढ़ किया जाये और इस कार्य के लिये पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाया जाये. उन्होंने कहा कि पी.जी. कोर्स शुरू करना और आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता है. इन पद्धतियों के डॉक्टरों को गाँवों में पदस्थ करने की कार्यवाही की जा रही है.

हार्डिया ने कहा कि शासकीय आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी अस्पतालों में अधिक से अधिक मरीज इलाज कराने आयें, इसकी ओर विशेष ध्यान दिया जाये. उन्होंने इसके लिये विशेष रूप से प्रचार-प्रसार करने तथा लोगों में देशज चिकित्सा पद्धतियों के प्रति आस्था बढ़ाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है और पी.जी. कोर्स शुरू करने के बाद इसे और गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि इन कॉलेजों में जो भी कमियाँ हैं, उन्हें दूर करने के लिये शासन प्रतिबद्ध है. हार्डिया ने कहा कि फैकल्टी की सेवा निवृत्ति आयु 60 से 65 करने पर विचार किया जायेगा. बैठक में यह तथ्य उभरकर आया कि आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी अस्पतालों में इलाज करवाने आने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.

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