• मैच ड्रा की ओर

मुंबई 25 नवंबर. वानखेड़े स्टेडियम भले ही सचिन तेंदुलकर के महाशतक का इंतजार पूरा न करा पाया हो, लेकिन आर अश्विन 103 के लगाए पहले शतक की बदौलत भारत तीसरे टेस्ट मैच में फालोआन बचाने में सफल रहा. वेस्टइंडीज ने चौथे दिन स्टंप के समय भारत पर 189 रनों की बढ़त बना ली है. कल मैच का आखिरी दिन है और जिस तरह से खेल हो रहा है उससे कोई परिणाम आने की उम्मीद कम ही है.

वेस्टइंडीज की पहली पारी में 156 रन देकर पांच विकेट लेने वाले ऑफ स्पिनर अश्विन ने आखिरी बल्लेबाज के रूप में आउट होने से पहले 118 गेंद पर 103 रन (15 चौके व 2 छक्के) बनाए. उनकी इस पारी से भारतीय टीम चाय के विश्राम से ठीक पहले 482 रन बनाकर आउट हुई. अश्विन के अलावा सचिन तेंदुलकर 94, राहुल द्रविड़ 82, गौतम गंभीर 55 और विराट कोहली 52 ने भी उपयोगी पारी खेली. वेस्टइंडीज ने दूसरी पारी में स्टंप के समय दो विकेट खोकर 81 रन बना लिए हैं. उस समय क्रीज पर क्रेग ब्राथवेट 34 और डेरेन ब्रावो 27 रन बनाकर जमे हुए हैं. विंडीज के दोनों विकेट प्रज्ञान ओझा ने हासिल किए. पहली पारी में 590 रन बनाने वाले वेस्टइंडीज को इस तरह से 108 रन की बढ़त हासिल हुई. टेस्ट क्रिकेट में पहली बार ऐसा हुआ जब पहली पारी में कुल 11 खिलाडिय़ों ने 50 या उससे ज्यादा रन बनाए हैं. पहली पारी के आधार पर बड़ी बढ़त हासिल करने के बाद वेस्टइंडीज को दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत नहीं मिली और मात्र छह रन के स्कोर पर ओझा ने एंड्रियन बराथ 3 को लक्ष्मण के हाथों कैच आउट कराकर पैवेलियन भेज दिया. थोड़ी देर बाद ओझा ने किर्क एडवड्र्स 17 को स्टंप कराकर दूसरा झटका दिया.

हालांकि दोहरे झटके के बाद ब्राथवेट और ब्रावो ने अपनी टीम को और कोई झटका नहीं लगने दिया. दोनों ने भारतीय फिरकी आक्रमण का बखूबी जवाब दिया और तीसरे विकेट के लिए 51 रनों की अविजित साझेदारी कर मैच को ड्रा की तरफ मोड़ दिया है. इससे पूर्व चौथे दिन के खेल की विशेषता अश्विन का शतक रहा. उन्होंने प्रथम श्रेणी मैचों में दो शतक लगाए थे. वह एक मैच में पारी में पांच विकेट और शतक जडऩे वाले तीसरे भारतीय बन गए हैं. उनसे पहले वीनू मांकड़ ने 1952 में इंग्लैंड के खिलाफ  लाड्र्स में जबकि पाली उमरीगर ने 1962 में वेस्टइंडीज के खिलाफ  पोर्ट ऑफ  स्पेन में यह उपलब्धि हासिल की थीं. भारत ने दूसरे सत्र में 106 रन जोड़े और इस बीच बाकी बचे चारों विकेट गंवाए. अपना तीसरा टेस्ट मैच खेल रहे अश्विन पर तब पहला शतक जडऩे से चूकने का खतरा मंडराने लगा था जबकि वह इससे 16 रन दूर थे और आखिरी बल्लेबाज ओझा उनका साथ देने के लिए क्रीज पर उतरे थे. ओझा ने हालांकि 14 गेंद झेलकर अश्विन का शतक बनाने में पूरी मदद की. वह बिना खाता खोले नाबाद रहे. अश्विन रवि रामपाल की गेंद पर चौका जड़कर शतक पूरा करने के तुरंत बाद शार्ट मिडविकेट पर खड़े एड्रियन बराथ को कैच थमा बैठे.

इंतजार बढ़ा

पिछले आठ महीने और 13 दिन से चला आ रहा इंतजार शुक्रवार को वानखेड़े स्टेडियम की बल्लेबाजी के लिए माकूल पिच पर भी खत्म नहीं हो पाया. सचिन तेंदुलकर केवल छह रन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक पूरा करने से चूक गए. वेस्टइंडीज के खिलाफ  तीसरे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच में जब लग रहा था कि तेंदुलकर अपने घरेलू मैदान पर महाशतक पूरा करके बड़ी संख्या में स्टेडियम में पहुंचे दर्शकों की मुराद पूरी करने में   सफ ल रहेंगे तभी रवि रामपाल खलनायक बनकर उभरे. तेंदुलकर जैसे ही आउट हुए पूरा स्टेडियम सकते में पड़ गया. कैरेबियाई कप्तान डेरेन सैमी ने गुरुवार शाम को बयान दिया कि वह कुछ भारतीयों का दिल तोडऩे का इरादा रखते हैं और उन्होंने इसमें अहम भूमिका निभाई. तेंदुलकर ने रामपाल की उठती हुई गेंद पर स्क्वायर ड्राइव करने की कोशिश की लेकिन गेंद सीधे दूसरी स्लिप में खड़े सैमी के पास पहुंच गई. तेंदुलकर की निराशा उनके चेहरे पर देखी जा सकती थी. वह धीमे.धीमे कदमों से जब पवेलियन जा रहे थे तो दर्शकों के भी चेहरे लटके हुए थे. तेंदुलकर ने सुबह 67 रन से अपनी पारी आगे बढ़ाई और वह जल्द से जल्द तिहरे अंक में पहुंचने के मूड में दिखे. सैमी ने जब दूसरी नई गेंद ली तो उससे भी तेंदुलकर को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. उनकी टाइमिंग शानदार थी और वह फि देल एडवडर्स की गेंद पर अपर कट से थर्ड मैन पर छक्का जड़कर 90 रन के पार पहुंचे थे. उन्होंने अपने साथी विराट कोहली के साथ कुछ तेज रन भी लिए थे लेकिन उस शतक को बनाने से चूक गए जिसका पूरे क्रिकेट जगत को लगभग 6,170 घंटों से इंतजार था. उन्होंने अपनी पारी में 153 गेंद खेली तथा आठ चौके और दो छक्के लगाए.  तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आखिरी शतक इस साल 12 मार्च को दक्षिण अफरीका के खिलाफ विश्व कप में नागपुर में लगाया था.

इसके बाद वह चार वनडे मैच और सात टेस्ट मैचों की 13 पारियां खेल चुके है. इस तरह से वह कुल 17 पारियों में शतक नहीं लगा पाए हैं. इस स्टार बल्लेबाज ने अब तक टेस्ट मैचों में 51 और वन डे में 48 शतक लगाए हैं. उनके पास वेस्टइंडीज के खिलाफ  नई दिल्ली में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी शतक बनाने का मौका था लेकिन वह दूसरी पारी में 76 रन बनाकर पगबाधा आउट हो गए थे. इसके बाद कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वह 38 रन ही बना पाए थे. इससे पहले वह इंग्लैंड के खिलाफ  ओवल टेस्ट मैच में भी 91 रन पर आउट हो गए थे जबकि पाकिस्तान के खिलाफ  मोहाली में विश्व कप   सेमीफइनल में वह 85 रन बनाकर आउट हो गए थे. आखिरी शतक जडऩे के बाद से तेंदुलकर छह अर्धशतक लगा चुके हैं.

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