भोपाल,28 अप्रैल,नभासं. मै अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया…. यह बात भोपाल निवासी पीएन केबाले पर सौ फीसदी लागू होती है. इन्होंने आज से 35 साल पहले गरीब परिवार में मरने वाले व्यक्ति और लावारिस शवों का सम्मान पूर्वक संस्कार का काम हाथ में लिया था. तब वे अकेले ही थे, लेकिन आज उनके साथ दो दर्जन से अधिक लोग इस पुण्य में भागीदार बनने को आतुर हैं. हालत यह है कि दाह संस्कार करने के लिए अभी भी 30 से अधिक लोग क्यूं में लगे हुए हैं.

गरीब परिवार के मृतकों और लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक संस्कार करवाकर पुण्य कमाने के लिए तीस से अधिक लोग क्यूं में लगे हुए हैं. तीन हजार से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार करवा चुके केबाले ने बताया कि लोगों ने उन पर जोर डालना शुरू किया कि उन्हें भी इस काम में शामिल किया जाए. लोगों की बात का मान रखते हुए उन्होंने वर्ष 2009 से रजिस्ट्रेशन करना शुरू किया. अब तक 32 लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. कोई व्यक्ति उनके पास मदद मांगने आता है तो रजिस्ट्रेशन के अनुसार, जिसका नंबर आता है उसे सूचित कर दिया जाता है. तब वह व्यक्ति मृतक के संस्कार पर आने वाले खर्चे को वहन करता है.

पुलिस वाले भी आने लगे मदद मांगने
उन्होंने बताया जैसे-जैसे लोगों को इस बात की जानकारी लगी उनके पास गरीब लोग मदद मांगने आने लगे. यहीं नहीं पुलिस वाले भी लावारिश शवों को सम्मान पूर्वक दफनाने के लिए मदद मांगने आने लगे. लावारिश शवों को दफनाने के लिए सरकार केवल 25 रुपए देती है.

लगते हैं दो हजार रुपए
लावारिश शवों को दफनाने के लिए ढाई से चार सौ रुपए लगते हैं यदि बहुत ही सड़ी-गली लाश हो तो सौ रुपए अलग से लगते हैं. किसी गरीब के घर के मृतक के दाहसंस्कार में दो हजार तक खर्च आता है. जिसमें लकड़ी,कफन, बांस-बल्ली सहित अन्य समान का खर्च शामिल है.

गरीब ने बदल दी दुनिया
न्यू मार्केट स्थित दुकान पर अचानक सुबह दस एक गरीब आदमी आकर रोने लगा और कहा उसकी पत्नी मर गई है. उसके कफन-दफन के लिए पैसे नहीं हैं और न ही उसकी पत्नी को कोई कंधा देने वाला है, क्योंकि वह समाज से बहिष्कृत है. उसकी बातें सुनने के बाद  केबाले ने आसपास के दुकानदारों के उसकी मदद मांगी. इस पर एक दुकानदार ने उन्हें व्यंग्य कर दिया कि आपने भीख मांगने का काम कब से शुरू कर दिया. उसी समय उन्होंने संकल्प लिया उनके पास दाहसंस्कार के लिए मदद मांगने आएगा उसकी अकेले ही जितनी हो सकेगी मदद करेंगे. यह सिलसिला अनवरत आज भी जारी है.

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