10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, खिलाडिय़ों ने दी बधाई, हरियाणा सरकार ने की 1 करोड़ की घोषणा

लंदन, 30 जुलाई. स्टार निशानेबाज गगन नारंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए  लंदन ओलंपिक की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में पहला पदक डाल दिया है. नारंग बीजिंग ओलंपिक में फाइनल में जगह नहीं बना सके थे लेकिन इस बार उन्होंने पदक पर निशाना लगाया. यह अलग बात है कि बीजिंग में इस स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाले अभिनव बिंद्रा इस बार फाइनल में नहीं पहुंच सके.

चार साल पहले बीजिंग ओलंपिक में भारत के लिये व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने बिंद्रा 600 में से 594 स्कोर करके 47 प्रतियोगियों में 16वें स्थान पर रहे. इसके साथ ही उन्होंने लगातार दो स्वर्ण जीतने वाले दुनिया के पहले निशानेबाज बनने का मौका गंवा दिया. दो बार के विश्व रिकॉर्डधारी नारंग ने दिल्ली राष्टï्रमंडल खेल 2010 में चार स्वर्ण और ग्वांग्झू एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीते थे. वह मेलबर्न राष्टï्रमंडल खेल 2006 में भी चार पीले तमगे जीत चुके हैं वहीं देश को लंदन ओलंपिक में पहला पदक दिलाने वाले निशानेबाज गगन नारंग को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, क्रिकेट खिलाडिय़ों आदि  ने बधाई दी है.

गगन ने 10 मीटर एयर राइफ्ल स्पर्धा में कांस्य प्राप्त किया है. ओलंपिक में पहली जीत दर्ज करके भारत के लिए पदकों का सूखा खत्म करने वाले गगन के लिए इसी के साथ बधाइयों का तांता लग गया है. शूटिंग रेंज में गगन के खेल को काफ्ी नजदीक से देख रहे खेल मंत्री अजय माकन ने कहा है कि गगन का प्रदर्शन काबिलेतारीफ था और वह बेहद करीब से स्वर्ण पदक से चूक गए जिसका उन्हें थोड़ा-सा अफसोस है. माकन ने कहा क गगन ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया. नारंग ने कुल 701.1 अंक के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया. मुझे पूरी उम्मीद है कि गगन के इस पदक से बाकी एथलीटों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे देश के लिए और भी अधिक पदक आएंगे. भारतीय ओलंपिक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने भी निशानेबाज गगन की इस जीत पर खुशी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि गगन के इस पदक से और पदकों के आने की उम्मीद बंधी है. इस बीच हरियाणा सरकार ने गगन नारंग की इस जीत के लिए उन्हें एक करोड़ रुपये की इनामी राशि देने की घोषणा की है.

नाकाम रहे बिंद्रा

बीजिंग ओलंपिक खेलों में दस मीटर एयर राइफल्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा भी ओलंपिक में इस स्पर्धा को लेकर पिछले 28 साल से चला आ रहा मिथक तोडऩे में नाकाम रहे. बिंद्रा लंदन ओलंपिक खेलों में दस मीटर एयर राइफल्स के फाइनल के लिये क्वालीफाई नहीं कर पाये. इस तरह से वह भी उन निशानेबाजों की सूची में शामिल हो गये, जो इस स्पर्धा में कभी अपने खिताब का बचाव नहीं कर पाये. ओलंपिक निशानेबाजी में दस मीटर एयर राइफल्स की स्पर्धा 1984 में शामिल की गयी थी और तब से अब तक कोई भी निशानेबाज इसमें अपने खिताब का बचाव नहीं कर पाया है. उम्मीद थी कि बिंद्रा यह मिथक तोडऩे में नाकाम रहेंगे, लेकिन वह क्वालीफिकेशन में 600 में से 594 अंक बनाकर 47 भागीदारों में 16वें स्थान पर रहे. ओलंपिक में दस मीटर एयर राइफल्स का पहला स्वर्ण पदक 1984 में फ्रांस के फिलिप हेब्रेल ने जीता था, लेकिन इसके चार साल बाद 1988 में सोल ओलंपिक में उन्होंने भाग नहीं लिया.

भूपति-बोपन्ना आगे बढ़े

महेश भूपति और रोहन बोपन्ना की सातवीं वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ओलंपिक में विजय मंच पर पहुंचने के अपने अभियान की अच्छी शुरुआत करते हुए यहां टेनिस प्रतियोगिता के पुरुष युगल में दूसरे दौर में जगह बनायी लेकिन अंतिम क्षणों में एकल में जगह बनाने वाले विष्णु वर्धन पहले दौर में हार गये.  भूपति और बोपन्ना ने आल इंग्लैंड क्लब में खेले गये बेहद कड़े मुकाबले में बेलारूस के मैक्स मिर्नयी और अलेक्सांद्र बरी को 7-6, 6-7, 8-6 से हराया.  उनका अगला मुकाबला जुलियन बेनातू और रिचर्ड गास्केट की फ्रांसीसी जोड़ी से होगा.

यह मुकाबला दो घंटे 46 मिनट तक चला जिसमें पहले दो सेट टाईब्रेकर तक खिंचने के बाद तीसरे और निर्णायक सेट में भी आखिरी क्षणों में भारतीय जोड़ी प्रतिद्वंद्वी टीम की सर्विस तोडऩे में सफल रही. भूपति और बोपन्ना ने मैच में अधिक बेजा गलतियां की लेकिन उन्होंने प्रतिद्वंद्वी टीम के 37 विनर की तुलना में 49 विनर लगाने का फायदा मिला. पहले दोनों सेट दोनों टीमों ने अपनी सर्विस बचाये रखी जिससे मुकाबला टाईब्रेकर तक पहुंचा. इनमें से पहले सेट के टाईब्रेकर में भारतीय जोड़ी ने 7-4 से जीत दर्ज की लेकिन दूसरे सेट के टाईब्रेकर में वह 4-7 से हार गयी. तीसरे और निर्णायक सेट में भी दोनों टीमें एक समय 6-6 से बराबरी पर थी. भूपति और बोपन्ना आखिर में 13वें गेम में ब्रेक प्वाइंट लेने में सफल रहे जो आखिर में निर्णायक साबित हुआ.

सातवें नंबर पर रहीं चानू

भारत की महिला भारोत्तोलक सोनिया चानू 48 किग्रा भार वर्ग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में नाकाम रहीं और कुल 171 किग्रा वजन उठाकर सातवें स्थान पर रहीं. मणिपुर की 32 वर्षीय सोनिया ने एक्सेल एरेना में स्नैच में 74 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 97 किग्रा वजन उठाया और उन्हें 12 भारोत्तोलकों में सातवां स्थान मिला. दिल्ली राष्टï्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली सोनिया अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में नाकाम रहीं. उन्होंने हाल में एशियाई चैंपियनशिप में 175 किग्रा वजन उठाया था. हालांकि अगर वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी करतीं तब भी उन्हें पदक नहीं मिल पाता. प्रतियोगिता का स्वर्ण चीन की मिनगुयान वान ने कुल 205 किग्रा वजन उठाकर जीता जबकि जापान की हिरोमी मियाक ने 197 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक जीता. कांस्य पदक उत्तर कोरिया की रियांग चुन के खाते में गया जिन्होंने कुल 192 किग्रा भार उठाया.

‘मुझे अपने बेटे पर गर्व है’

हैदराबाद. कई मीडियाकर्मियों से घिरे गगन के पिता बी.एस. नारंग ने अपने बेटे की इस जीत पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि गगन हमेशा कहता था कि कई प्रतिस्पधाओं में मैंने पदक जीते हैं लेकिन ओलंपिक में अगर एक पदक मिल जाए तो मेरा सपना पूरा हो जाएगा. गगन के पिता ने कहा कि उसके इस पदक से अन्य एथलीटों को भी जीतने की प्रेरणा मिलेगी. उन्होंने कहा कि अभी भी उन्हें उम्मीद है कि देश को अन्य प्रतिस्पर्धाओं में जरुर पदक मिलेंगे. बेशक कांस्य पदक जीतकर देश के लिये पदक का सूखा खत्म करने वाले गगन ने इस जीत के साथ ओलंपिक में पदक जीतने का अपना सपना पूरा कर लिया.

गगन की माता अमरजीत नारंग ने भी अपने बेटे की इस जीत पर खुशी व्यक्त की और सभी को मिठाई बांटी. उन्होंने बताया कि जब गगन लंदन के लिए रवाना हो रहे थे तब उन्हें सिर्फ अच्छा करने का आशीर्वाद दिया था. उन्होंने कहा कि जब गगन स्वदेश लौटेंगे तो वह उनका शानदार स्वागत करेंगी और उनके पसंदीदा छोले पूड़ी बनाएंगे. गगन को इस जीत का कितनी बेसब्री से इंतजार था इसका इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गगन ने अपनी स्पर्धा खत्म होने के बाद सभी से गले मिलकर उन्हें बधाई दी और अपनी राइफल को आसमान में दिखाकर भगवान को इसके लिए धन्यवाद दिया है.

अगले मुकाबले होंगे मुश्किल : साइना

पहला मैच जीतने के बाद साइना नेहवाल ने कहा उनका पहला मैच काफी मुश्किल था. इससे आगे के मुकाबले भी काफी मुश्किल भरे होते जाएंगे लंदन ओलंपिक में भारतीयों के प्रदर्शन की निराशा के बीच पदक की सबसे बड़ी उम्मीद साइना नेहवाल ने जीत के साथ शुरुआत की है. लेकिन जीत से आगाज के बावजूद साइना को एहसास है कि आगे चुनौतियों का क्रम शुरू होना बाकी है. ग्रुप स्टेज में महिला सिंगल्स का पहला मैच जीतने के बाद साइना ने बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत में कहा कि मेरा पहला मैच भी काफी मुश्किल था. इससे आगे मैच काफी मुश्किल भरे होते जाएंगे. अभी देखना है कि मैं अगले मैच में कैसा खेलती हूं.

22 साल की साइना का अगला मैच देर रात सोमवार को बेल्जियम की लियाने तान के साथ होगा.
हैदराबाद की इस शटलर ने कहा कि मैं लंदन ओलंपिक में अपनी पिछली गलतियों को दूर करके आई हूं. ओलंपिक से पहले मैंने कुछ टूर्नामेंट खेले थे. उनमें मेरे से कुछ गलतियां हुई थीं. मैंने उन पर काफी काम किया है और मेरी कोशिश होगी कि मैं ओलंपिक के दौरान इन्हें न दोहराऊं. ओलंपिक से पहले मैंने कुछ टूर्नामेंट खेले थे. उनमें मेरे से कुछ गलतियां हुई थीं. मैंने उन पर काफी काम किया है और मेरी कोशिश होगी कि मैं ओलंपिक के दौरान इन्हें न दोहराऊं.

साइना ने कहा कि मैं अपने पहले मैच के काफी खुश हूं क्योंकि मैं काफी सही ढंग से मूव कर पा रही थी और मेरे स्ट्रोक भी काफी अच्छे गिर रहे थे. साइना ने ग्रुप स्टेज के महिला सिंगल्स के पहले मैच में अपनी प्रतिद्वंद्वी सबरीना जैकेट को 21-9, 20-4 से सीधे सेटो में हराया . साइना ने कहा कि पहला मुकाबला अच्छा रहा. मुझे खुशी है कि मैं अच्छे आत्मविश्वास के साथ खेल पा रही हूं. साइना ने कहा कि अभी टूर्नामेंट शुरू हुआ है लेकिन पहले मैच में उनकी एड्जेस्टमेंट काफी अच्छी थी.

Related Posts: