नई दिल्ली, 17 अप्रैल. गंगा की निर्मलता और अविरलता के मुद्दे पर मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गंगा बेसिन अथॉरिटी की बैठक हुई. गंगा संरक्षण के लिए समय खत्म होते जाने की चेतावनी जारी करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को मलजल शोधन पर ढीले रवैये को लेकर प्रदेश सरकारों को आड़े हाथों लिया और उनसे दोषी उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा.

गंगा में हर दिन 2,9000 लाख लीटर प्रदूषित जल गिरने पर चिंता जाहिर करते हुए सिंह ने प्रदेश सरकारों से नये मलजल शोधन संयंत्रों के प्रस्ताव भेजने को कहा. परियोजनाओं के लिए पर्याप्त मात्रा में कोष उपलब्ध है.  उन्होंने औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि औद्योगिक प्रदूषण कुल प्रदूषण का महज 20 फीसदी हैं यह चिंता का गंभीर विषय है. क्योंकि यह जहरीला और अजैविक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण रिसाव मानकों के मुताबिक इस पर निगरानी रखने की जरूरत है.

सिंह ने कहा, ”राज्य बोर्डों को केंद्र सरकार से मिली शक्तियों के तहत दोषी उद्योगों के खिलाफ अवश्य कार्रवाई करनी चाहिए.” प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ”समय हमारे पक्ष में नहीं है और हमें त्वरित कार्रवाई करनी है.” उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का निपटारा टुकड़ों में नहीं होना चाहिए और उन्हें वैज्ञानिक आधार पर खरा उतरना चाहिए. सिंह ने कहा कि दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजना बनाने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय ने सात आईआईटी के एक समूह का गठन किया है. इसका काम गंगा के लिए नदी बेसिन प्रबंधन की व्यापक योजना तैयार करना है. उन्होंने बताया कि आईआईटी समूह अपनी योजना में नदी के पारिस्थितिकी स्वास्थ्य को बहाल और बरकरार रखने के लिए सिफारिशें देगा. इसमें जल के इस्तेमाल और भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के तरीके में जरूरी बदलाव को भी जगह दी जाएगी. सिंह ने कहा, ”यह योजना गंगा को साफ रखने और इसकी धारा को बनाए रखने के लिए हमारे द्वारा सामना किए जाने वाली चुनौतियों से निपटने वाले एनजीआरबीए की कार्ययोजना का आधार बनेगा.” उन्होंने बताया कि समूह ने पांच प्रारंभिक रिपोर्टें सौंप दी है. सिंह ने उन्हें अपना काम तेजी से और पूरी मेहनत के साथ करने की अपील की.

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