मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

भोपाल,8 दिसंबर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने आज प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर भोपाल गैस त्रासदी के ऐसे 10 हजार 47 गैस पीडि़तों, जो वास्तव में मृतकों की श्रेणी में हैं पर केन्द्र सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह एवं केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उनके परिवार को अनुग्रह राशि वितरण के मापदण्ड में शामिल नहीं किया गया, के परिजनों को दस-दस लाख रूपया मुआवजा देने का अनुरोध किया है. उल्लेखनीय है कि यदि चौहान का यह आग्रह स्वीकार किया जाता है तो भोपाल गैस त्रासदी के 15 हजार 342 प्रकरणों में आश्रितों को न्यायसंगत निर्णय मिल सकेगा.

पत्र में मुख्यमंत्री ने इसी सन्दर्भ में गत वर्ष 24 जून को लिखे पत्र की ओर ध्यान दिलाते हुये गैस पीडि़तों के प्रतिधिनियों के साथ प्रधानमंत्री से भेंट का समय मांगा है. चौहान ने पत्र में उल्लेख किया है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 2 एवं 3 दिसम्बर, 1984 की रात्रि में घटित गैस त्रासदी विश्व की सबसे भयावह औद्योगिक एवं पर्यावरणीय त्रासदी थी. इस घटना के तत्काल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने को बंद कर दिया गया तथा जांच सी.बी.आई. को सौंपी गई. भारत सरकार द्वारा भोपाल गैस लीक डिजास्टर (प्रोसेसिंग ऑफ क्लेम्स) एक्ट 1985 पारित कर, मुआवजे से संबंधित समस्त अधिकार अपने पास सुरक्षित कर लिये थे.

भारत सरकार के स्तर पर मंत्री समूह का गठन श्री पी. चिदंबरम, गृह मंत्री की अध्यक्षता में किया गया. इस मंत्री समूह को यह दायित्व सौंपा गया कि गैस पीडि़तों के हित में विचाराधीन मुद्दों पर आवश्यक अनुशंसाएं की जायं. चौहान ने लिखा है कि मंत्री समूह की बैठकों में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से भोपाल शहर के गैस पीडि़तों को उचित एवं सम्मानजनक मुआवजा दिलाने के लिये भारत सरकार से अनुरोध किया गया था और मांग की गई थी कि गैस दुर्घटना में मृतकों के परिवारों को 10 लाख रूपये एवं गैस प्रभावित व्यक्तियों को पांच लाख रूपये का मुआवजा दिया जाय. भारत सरकार द्वारा भोपाल गैस लीक डिजास्टर एक्ट के तहत मुआवजा वितरण हेतु पृथक से न्यायिक अधिकरण गठित किया गया. यह भारत सरकार के सीधे नियंत्रण में संचालित है. इस अधिकरण में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट पदस्थ किए गए थे. मंत्री समूह की बैठकों में 5 लाख 14 हजार 376 गैस पीडि़तों के प्रकरणों में से कुल 48 हजार 694 प्रकरणों में विभिन्न श्रेणियों में अतिरिक्त अनुग्रह राशि, पूर्व में प्रदान की गई मुआवजा राशि को घटाकर, वृद्धि की जाकर भुगतान करने की अनुशंसा की गई.

चौहान ने गत वर्ष 24 जून को लिखे गये पत्र की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुये बताया है कि उक्त पत्र में अनुरोध किया गया था कि 10,047 गैस पीडि़त ऐसे हैं जो वास्तव में मृतकों की श्रेणी में है, परन्तु मंत्री समूह एवं केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उक्त मृत व्यक्तियों के परिवार को अनुग्रह राशि वितरण के मापदण्ड में शामिल नहीं किया गया. चौहान ने पत्र में बताया है कि मृत्यु श्रेणी में दावों का जो वर्गीकरण किया गया है उसमें मृत व्यक्ति को स्थाई एवं आंशिक निशक्तता की श्रेणी में माना गया है. इसी प्रकार कुछ अन्य मामलों में मृत्यु का कारण गैस प्रभाव न मानते हुए उन्हें सामान्य वर्ग में माना गया है. यह वर्गीकरण न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता. अत: 10,047 प्रकरणों को मृतक श्रेणी में मानकर ही इनको भी 10.00 लाख रूपये का मुआवजा दिया जाय. इससे गैस त्रासदी में मृत श्रेणी के कुल 15 हजार 342 प्रकरणों में आश्रितों को न्यायसंगत निर्णय मिल सकेगा. इसके अतिरिक्त 5 लाख 21 हजार 332 व्यक्ति जो वास्तव में आंशिक गैस पीडि़तों की श्रेणी में थे, को अतिरिक्त मुआवजा प्रदान करने की कोई अनुशंसा नहीं की गई, इन प्रकरणों पर भी उचित विचार करते हुए मुआवजा दिलाया जावे ताकि गैस पीडि़तों को न्याय प्राप्त हो सके. चौहान ने अनुरोध किया है कि विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी में भोपाल शहर के पीडि़त नागरिकों की मांग है कि उन्हें उचित एवं सम्मानजनक मुआवजा भारत सरकार से दिलाया जाये. श्री चौहान ने इन बिन्दुओं पर पुन: विचार कर सकारात्मक निर्णय लिये जाने का प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हुये भोपाल गैस त्रासदी पीडि़तों के साथ न्याय किये जाने का आग्रह किया है.

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