मूल्य वृद्धि का हो रहा चौतरफा विरोध

भाव में अब तक की सबसे ऊंची छलांग, 7.50 रुपए बढ़े

नयी दिल्ली, 23 मई, नससे.  आम आदमी को एक बार फिर पेट्रोल की दरों में बढ़ोतरी की मार झेलनी पड़ेगी. पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रूपए प्रति लीटर का इजाफा हो गया है. बढ़ी हुई दरें बुधवार रात से लागू हो जाएंगी. यह पहला मौका है जब पेट्रोल के दामों में सर्वाधिक बढ़ोतरी की गई है. इससे देशभर में लोगों में भरी गुस्सा है.

संसद का बजट सत्र मंगलवार को समाप्त होने के साथ ही साफ संकेत मिलने लगे थे कि तेल विपणन कंपनियां किसी भी समय पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है, हुआ भी ऐसा ही.  घटक दलों की नाराजगी के बावजूद सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए बुधवार को हरी झंडी दे दी. तेल कंपनियां ने पेट्रोल की कीमत में एक दिसम्बर 2011 को अंतिम बार बढ़ोतरी की थी और इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और अरूणाचल विधानसभाओं और अप्रेल में दिल्ली नगर निगमों के चुनाव फिर बजट सत्र की वजह से दाम नहीं बढ़ाए जा सके. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वित्त विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में वित्तीय विधेयक पर हुई चर्चाओं का उत्तर देते हुए इस बात के संकेत दिए थे कि यदि कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बिगड़ सकती है.

सरकार के खिलाफ  मोर्चा

पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी किए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भारतीय जनता पार्टी [भाजपा], समाजवादी पार्टी [सपा] व वामदल ने पेट्रो मूल्य वृद्धि के विरोध में देशभर में आंदोलन करने का एलान किया है. वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी भी पेट्रो मूल्य वृद्धि का विरोध कर रही हैं.

ममता ने कहा कि हम पेट्रोल मूल्य में वृद्धि को स्वीकार नहीं कर सकते हैं. पेट्रोल कीमत में वृद्धि अनुचित और एकतरफा, यह फैसला हमारी जानकारी के बिना किया गया है. वहीं सरकार की अहम सहयोगी डीएमके ने भी कहा है कि पेट्रोल के बढ़े दाम कम हों. भाजपा ने कहा कि इससे महंगाई और बढ़ेगी और आम आदमी का जीवन पहले से भी दूभर हो जाएगा. भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पेट्रोलियम बढ़ोतरी तर्कहीन है और इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है. इससे मुद्रा स्फीतिकारी दबाव और बढ़ेगा तथा कीमतों में बढोतरी होगी. आम आदमी की जीना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के समय खाद्य एवं सामान्य अर्थव्यवस्था के घोर कुप्रबंधन के कारण रुपये में गिरावट आई है और इसी वजह से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई.

तेल माफि याओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश

भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी को केन्द्र सरकार की बेशर्मी करार देते हुए कहा कि हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठेगा. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार तेल माफियाओं को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है. श्री नकवी ने जोर दिया कि इस मामले को भाजपा जोर शोर से उठाएगी.

रुपया पहुंचा 56 से भी नीचे

नई दिल्ली, 23 मई, नससे. रुपये में गिरावट का दौर आज लगातार छठे दिन भी जारी रहा और यह आज कारोबार के दौरान 56 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया.

शेयर बाजार के कमजोर रुख के बीच आयातकों विशेषकर तेल रिफाइनरी कंपनियों की डॉलर मांग से रुपये में गिरावट जारी रही और यह अपने एक और सर्वकालिक निचले स्तर पर चला गया. डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से एक तरफ जहां तेल कंपनियों के लिए कच्चे तेल का आयात और महंगा हो जाता है वहीं दूसरी तरफ निर्यातकों की आय बढ़ती है. लेकिन यूरोप और अन्य विकसित देशों में जारी मंदी से निर्यात मांग भी इस समय दबाव में है. ऐसे में व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ रहा है.

सरकार की गलत नीतियों के कारण गिरावट-भाजपा

डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरती कीमत को लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि ऐसा सरकार की गलत नीतियों के कारण हो रहा है. भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि क्या सरकार रुपये की कीमत में गिरावट को रोकने के लिए कुछ करेगी.

श्री प्रसाद ने कहा कि हम रुपये की कीमत में गिरावट को लेकर चिंतित हैं. महंगाई का आम लोगों पर बुरा असर हो रहा है. लेकिन मुझे यह बात सबसे अधिक हैरान करती है कि सरकार पूरी तरह निष्क्रिय है. भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने संप्रग सरकार के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे समारोहों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि आप सत्ता में तीन साल पूरे होने पर समारोह मना रहे हैं तो यह देश की शेष जनता के लिए आपदा जैसी स्थिति है, जो बुरी तरह परेशान है. उन्होंने कहा कि संप्रग को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है.

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