भोपाल, 4 सितंबर,नभासं.इस सत्र में शिक्षकों की कमी सबसे ज्यादा सरकारी स्कूलों में हैं.

इनकी भरपाई अतिथि शिक्षकों से भी नहीं हो पा रही है. वहीं संविदा शिक्षकों की नियुक्ति भी अधर में अटकी हुई है. अब ऐसे में शिक्षकों की पूर्ति कैसे की जाए, इसको लेकर खुद शिक्षा विभाग असमंजस की स्थिति में है. वहीं शिक्षकों की कमी से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

गौरतलब है कि राजधानी में सरकारी स्कूलों की संख्या 1250 है, जिनमें करीब 1 लाख  से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. इन सरकारी स्कूलों में सत्रारंभ से ही शिक्षकों की कमी हैं जिसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों में टीचरों की कमी अतिथि शिक्षकों से पूरी करने का फैसला किया था, लेकिन अब तक स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पाई है. साथ ही इस सत्र में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति भी खटाई में पढ़ गई हैं. वहीं अभी स्कूलों में जितने शिक्षक तैनात हैं, वह कभी चुनाव कार्य में तो कभी पल्स पोलियों या अन्य सरकारी कार्यो में ड्यूटी लग जाती है. जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. स्कूलों में कई विषयों के शिक्षक नहीं है. खासतौर पर भौतिक, विज्ञान और गणित के शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी है. शिक्षा का अधिकार कानून के तहत शिक्षकों की पर्याप्ता पर भी सवालिया निशान लग गए हैं. कानून के तहत 35 बच्चे पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है.

लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 60-70 पर एक शिक्षक तैनात है. वहीं बार-बार विज्ञापन और कोशिशों के बावजूद अतिथि शिक्षक बनने कोई भी रुचि नहीं ले रहा है. अगले साल होगी संविदा शिक्षकों की भर्ती- स्कूलों में संविदा शिक्षकों की भर्ती इस सत्र में अब तक अधर में अटकी हुई है ऐसे में इनकी भर्ती अगले सत्र में ही होने की संभावना है. इस साल विभाग सिर्फ संविदा शिक्षक वर्ग 2 के पदों का ही सृजन कर पाया है, लेकिन शेष पदों पर फैसला नहीं हुआ है. इन पर फैसला होने और भर्ती प्रक्रिया पूरी होते-होते साल बीत जाएगा.

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