जरदारी की जियारत

इस्लामाबाद, 9 अप्रैल.  एक तरफ जहां पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार को अजमेर में ख्वाजा गरीब नवाज के दर पर जियारत की वहीं दूसरी ओर मुंबई हमलों के साजि़शकर्ता जमात उद दावा के आतंकी हाफिज़ सईद को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत हाफिज सईद के खि़लाफ पुख़्ता सबूत दे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान सईद के मामले पर गंभीर है और यह भारत-पाक बातचीत में हमेशा से मुद्दा रहा है लेकिन इस्लामाबाद को सईद के खि़लाफ पुख्ता सबूत चाहिए. गिलानी ने कहा है कि 16 अप्रैल को भारत और पाकिस्तान के गृह सचिवों की बैठक में भी यह मुद्दा उठेगा. सईद पाकिस्तान में रह रहा है.  गिलानी ने कहा, यहां अदालतें स्वतंत्र हैं और हमें उसके खिलाफ ठोस सबूत की जरूरत है.

इस बात पर सहमति बनी है कि 16 अप्रैल को जब दोनों देशों के गृहसचिव मिलेंगे तब वे इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे. पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी उनसे इस मुद्दे पर सरकार के रुख के बारे में पूछ चुके हैं. लश्कर-ए-तयबा के संस्थापक सईद तब से विशेष चर्चा में है जब पिछले हफ्ते अमेरिका ने उन पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था. गिलानी ने हाल ही में संसद में कहा है कि सईद का मामला पाकिस्तान का आतंरिक मुद्दा है ओर उसके खिलाफ कोई भी सबूत पाकिस्तान को दिया जाना चाहिए ताकि उसकी अदालत जांच कर सकें.

‘गृह सचिव स्तर की वार्ता 22 मई के बाद हो’

भारत ने पाकिस्तान से दोनों देशों के गृह सचिवों के बीच बैठक के लिए 22 मई के बाद की कोई तारीख मांगी है. संसद का बजट सत्र 22 मई को संपन्न हो रहा है. भारत ने पाकिस्तान को सूचित किया है कि गृह सचिव आर के सिंह के लिए 16 अप्रैल को इस्लामाबाद जाना संभव नहीं है क्योंकि आंतरिक सुरक्षा पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक उसी दिन नयी दिल्ली में हो रही है. सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, हमने संसद सत्र के बाद ताजा तारीख देने के लिए कहा है. पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने 16 अप्रैल को गृह सचिव स्तर की वार्ता की संभावित तारीख बताई थी. यह बैठक इसलामाबाद में होनी है लेकिन मुख्यमंत्रियों की बैठक भी इसी दिन होने के कारण आर के सिंह का पाकिस्तान जाना संभव न होगा. मुख्यमंत्रियों की बैठक का आयोजन गृह मंत्रालय कर रहा है.

सईद पर सख्ती से बच रहा है पाकिस्तान

नई दिल्ली. भारत और पाक के बीच हर विवादित मसले का समाधान करने की इच्छा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भले ही जताई हो लेकिन मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज मोहम्मद सईद पर सख्ती से इसलामाबाद बचता ही नजर आ रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जरदारी के बीच मुलाकात के दौरान हाफिज सईद को लेकर हुई बातचीत से विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने यही निष्कर्ष निकाला है.

विदेश मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि मुंबई कांड के मास्टरमाइंड की गतिविधियों पर लगाम लगाने की मांग जब मनमोहन सिंह ने की तो जरदारी इस पर स्पष्ट और दो टूक जवाब देने से बचते रहे. पाकिस्तानी नेता ने यही कहा कि दोनों सरकारों को सईद के मुद्दे पर लंबी बातचीत करनी होगी. उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि जरदारी ने यह भी कहा कि सईद का मामला कानूनी दांवपेंच वाला है. विदेश मंत्रालय के अधिकारी इसका निहितार्थ यही निकाल रहे हैं कि जरदारी का इशारा सईद के खिलाफ सुबूतों की तरफ ही था.

एक अधिकारी ने कहा कि जरदारी ठीक वही कहना चाह रहे थे जो पाकिस्तानी सरकार कहती आ रही है. आंतरिक सुरक्षा मंत्री रहमान मलिक ने कई बार कहा है कि भारत से भेजे गए साक्ष्य सईद को सजा दिलाने के लिए नाकाफी हैं. अधिकारियों का कहना है कि यही कानूनी बातें हैं जिसका जिक्र जरदारी करना चाहते थे लेकिन खुलकर कर नहीं पा रहे थे. लेकिन इशारों में ही उन्होंने बहुत कुछ कह दिया. सईद की गतिविधियों पर लगाम लगाने की बात सिंह ने की थी तो कूटनीतिक तरीके से उन्होंने भी पाकिस्तानी नेता को बहुत कुछ संदेश दे दिया था. अमेरिका के ईनाम घोषित किए जाने के बावजूद पाकिस्तानी सरजमीं पर उसकी रैलियों की तरफ ही प्रधानमंत्री ने इशारा किया. पीएम यही बताना चाह रहे थे कि सईद की रैलियां पाक सरकार की नाक के नीचे चल रही हैं जो उसे सलाखों के पीछे भेजने के लिए काफी आधार हैं. पाकिस्तानी सरजमीं से भारत पर निशाना साध रहे आतंकियों के ढांचों को ढहाने की बात कह पीएम ने जरदारी को कड़ा संदेश देने की कोशिश की.

हालांकि जरदारी यह कहकर इसे टाल गए कि पाकिस्तानी भी आतंकवाद से पीडि़त है. इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने जरदारी का पाक आने का न्योता स्वीकार किया है तो वह पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाना चाह रहे हैं. सियोल में जब प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने मनमोहन को पाक दौरे का न्योता दिया था तो उन्होंने कहा था कि उनकी यात्रा के लिए कुछ ठोस नतीजे होने चाहिए. लेकिन अब जरदारी के न्योते को स्वीकार किया है तो अपनी यात्रा से पहले पाकिस्तानी सरकार पर आतंक के खिलाफ कुछ पुख्ता कदम उठाने का दबाव विदेश मंत्रालय बनाएगा. सूत्रों के अनुसार सिंह ने जरदारी से जब आतंक का मुद्दा उठाया था तो कहा था कि भारत के लोग पाकिस्तान के बारे में आतंक के खिलाफ उसके कदमों के आधार पर ही अपनी धारणा बदलेंगे.

भोज में नहीं थीं सोनिया

नई दिल्ली. संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी रविवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के सम्मान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से आयोजित भोज में शामिल नहीं हुई जिसका कारण उसका खराब स्वास्थ्य बताया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष को भोज में शामिल होने का आमंत्रण भेजा गया था लेकिन उन्होंने खेद पत्र भेज दिया. सोनिया गांधी ने भोज में शामिल नहीं होने का कारण संभवत: अपना खराब स्वास्थ्य बताया.

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