नई दिल्ली, 10 अक्टूबर मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह का सोमवार सुबह निधन हो गया। वह 70 साल के थे। वह मुंबई के लीलावती अस्पताल में ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती किए गए थे। सोमवार सुबह 8 बजे उनका निधन हो गया। बांद्रा में रह रहे जगजीत सिंह को 23 सितंबर को ब्रेन हेमरेज के बाद हॉस्पिटल में ऐडमिट करवाया गया था जहां उनकी सर्जरी की गई थी। कई भारतीय भाषाओं में अपनी गायकी के चलते मील का पत्थर साबित हो चुके जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को हुआ था। पद्मभूषण से सम्मानित थे जगजीत सिंह। राजस्थान के श्री गंगानगर में जन्मे जगजीत सिंह की चार बहनें और दो भाई थे। परिवार में उन्हें जीत के नाम से पुकारा जाता था। 1970- 80 के दशक के दौरान जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह , जो खुद भी विख्यात गजल सिंगर हैं , ने भारतीय गायकी जगत में सफलता का चरम पाया। रिकॉर्डेड इंडियन म्यूजिक में सफलता के विशालतम आयाम गढऩे वाला यह भारत का पहला कपल था। उनकी दिल को छू लेने वाली गजलों में शामिल हैं, होठों से छू लो तुम मेरे गीत अमर कर दो , दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है , तुमको देखा तो ये ख्याल आया , अपनी मर्जी से कहां अपने सफर के हम हैं , पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है , होशवालों को खबर क्या जिन्दगी क्या चीज है आदि। बॉलिवुड की हिट फिल्मों जैसे सरफरोश और तरकीब में भी उन्होंने गायकी दी।

जगजीत सिंह न सिर्फ गायक थे बल्कि कंपोजर , ऐक्टिविस्ट और उद्योगपति भी थे। हिन्दी और पंजाबी के अलावा उन्होंने उर्दू और नेपाली में गीतों को भी अपनी आवाज दी थी।

प्रधानमंत्री ने जताया शोक:
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रख्यात गजल गायक जगजीत सिंह के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि अपनी मखमली आवाज के लिए वह हमेशा याद किए जाएंगे। खुद को जगजीत सिंह का प्रशसक बताते हुए सिंह ने कहा कि इस महान गायक के अन्य प्रशसकों के दुख में वह भी शामिल हैं।

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