स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दो-दिवसीय राष्ट्रीय किशोरावस्था स्वास्थ्य कार्यशाला का शुभारम्भ

भोपाल, 14 जून, नभासं. दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्र मे रह रही किशोर वय की बालिकाओं को अच्छे स्वास्थ्य व स्त्रीजन्य रोगों के प्रति जागरूक किया जाना बड़ा जरूरी है.यह बात परिवार कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कही.वे आज यहाँ तृतीय राष्ट्रीय किशोरावस्था स्वास्थ्य कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.

दो-दिवसीय यह कार्यशाला लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, मानव संसाधन मंत्रालय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के सहयोग से आयोजित थी.कार्यशाला को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव  प्रवीर कृष्ण और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनोज झालानी ने भी संबोधित किया। मंत्री डा. मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण इलाके अथवा अन्य दूरदराज क्षेत्रों में रह रही किशोर उम्र की बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर अनेक जानलेवा व कष्टकारी बीमारियों से बचाया जा सकता है.

डा. मिश्रा ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में विज्ञापन, पोस्टर अच्छा माध्यम हो सकते हैं किन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में आँगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से किशोरी बालकाओं को यौन स्वास्थ्य एवं प्रजनन संबंधी जानकारी दी जाना आवश्यक है. डा. मिश्रा ने उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने ”बेटी बचाओÓÓ जैसे अभियान के साथ ही महिलाओं के कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ चलाई हैं.इन योजनाओं की सार्थकता तभी है जब हमारी बेटी स्वस्थ रहे.

डॉ. मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2013 के अंतर्गत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर तथा सकल प्रजनन दर को कम करना एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया है.सीमित संसाधनों में हमें इस कठिन कार्य को पूरा करना है.डॉ मिश्रा ने कहा कि किशोरी बलिकाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जिला अस्पतालों में प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किये गये हैं.वर्तमान में मध्यप्रदेश में ऐसे 142 क्लीनिक कार्यरत हैं.

बताया गया कि प्रदेश में लगभग 70 प्रतिशत किशोरी बालिकाएँ रक्त अल्पता से ग्रसित हैं.इनके लिये स्कूल शिक्षा एवं महिला-बाल विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर किशोरी एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है.इसमें 11 से 19 वर्ष की किशोरियों को आँगनबाड़ी तथा स्कूलों में प्रति सप्ताह आइरन फोलिक एसिड और प्रति छह माह में कृमिनाशक गोली एल्बेन्डॉजोल का वितरण किया जा रहा है. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के संयुक्त संचालक डॉ. के. एल. साहू ने बताया कि शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम के जरिये कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है.गत वर्ष से प्रदेश के 9 जिलों भिण्ड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, दतिया, देवास, सागर एवं विदिश में किशोरी बालिकाओं के लिए माहवारी स्वच्छता योजना का संचालन किया जा रहा है. कार्यशाला को आयुक्त परिवार कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य  मनोहर अगनानी, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश के प्रबंध संचालक रविन्द्र पस्तोर ने भी संबोधित किया. कार्यशाला में सभी राज्यों से आये लोक स्वास्थ्य, शिक्षा एवं महिला-बाल विकास विभाग के लगभग   100  प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं.

Related Posts: