वाशिंगटन, 11 जनवरी. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के चलते बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग से हिमयुग आने में देरी हो सकती है. पिछला हिमयुग लगभग 11500 वर्ष पहले तक रहा था, लेकिन अगले के समय के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है. विज्ञान की पत्रिका ‘नेचर जिओसाइंस’ में वैज्ञानिकों ने लिखा है कि स्वीकृत खगोलीय मॉडल के अनुसार अगला हिमयुग 1500 सालों के दौरान आ सकता है.

धरती को ठंडा होने में काफी वक्त लगेगा- लेकिन कार्बन उत्र्सजन की मात्रा इतनी ज्यादा है कि इसमें देरी है सकती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के शोधकर्ताओं ने लिखा है कि कार्बनडाई गैस का उत्सर्जन अब रुक भी जाए तो भी धरती को ठंडा होने में काफी वक्त लगेगा, आंकड़े यह बताते हैं कि इससे हिमयुग आने में हजारों वर्ष की देरी हो सकती है. खगोलीय मंडल का इस्तेमाल किया गया- यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के प्रोफेसर और रिपोर्ट के सह लेखक जिम चैनल का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह अच्छी खबर है, लेकिन ऐसा है नहीं. चैनल का कहना है कि अंटार्कटिका में ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ की मोटी परतें पिघल रहीं हैं और इससे समुद्र के आकार में बढ़ोतरी हो रही है. इस अध्ययन के लिए खगोलीय मंडल का इस्तेमाल किया गया. मौजूदा पैटर्न से संकेत मिलते हैं कि धरती की गर्मी का वर्तमान ग्राफ पर अगले 1500 वर्षों में रोक लग जानी चाहिए.

मुख्य कारण धरती के कक्ष में परिवर्तन-हिमयुग में इंटरग्लेशियल और फिर वापस हिमयुग में बदलने का मुख्य कारण धरती के कक्ष में परिवर्तन है. इन परिवर्तनों में धरती के सूर्य की परिक्रमा करने का अनोखापन, उसके अक्ष के झुकाव का परिमाण और उसकी अपनी धुरी पर धीमी घूर्ण गति शामिल है. यह सब कुछ हजारों सालों के अंतराल के बाद होता है. लेकिन लाखों सालों के अंतराल पर वह किस तरह धरती की जलवायु को उष्ण इंटरग्लेशियल से शीत हिमयुग में तब्दील करता है इसके कारणों का कुछ पता नहीं है. वैज्ञानिकों के अनुसार अपने बलबूते उनमें ये क्षमता नहीं है कि वो वैश्विक तापमान के अंतर को दोनों स्थितियों यानी इंटरग्लेशियल और हिमयुग में 10 डिग्री सेंटीग्रेड का अंतर ला सकें. हालांकि शुरू के कुछ बदलावों पर कार्बन डाईआक्साइड के उत्सर्जन जैसे कारणों का प्रभाव पड़ता है.

क्या है हिमयुग ?

हिमयुग पृथ्वी के जीवन में आने वाले ऐसे युग को कहा जाता है, जिसमें पृथ्वी सतह और वायुमंडल का तापमान लंबे अरसे के लिए कम हो जाता है. जिससे महाद्वीपों के बड़े भू-भाग पर ग्लेशियर फैल जाते हैं. ऐसा हिमयुग पृथ्वी पर पहले आ चुका है और वैज्ञानिकों का मानना है कि यह भविष्य में आते रहेंगे. आखिरी हिमयुग लगभग 20 हजार वर्षों पहले अपने चरम पर था. धरती पर बर्फ की मोटी चादर थी.

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