सुलझा जीवन का रहस्य

वाशिंगटन, 14 दिसंबर. इंसान ब्रह्मांड की मौजूदगी के रहस्य के काफी करीब पहुंच चुका है. साइंटिस्टों ने दावा किया कि उन्होंने  गॉड पार्टिकल  की पहली झलक देखी है. गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसोन वे कण है , जिसकी ब्रह्मांड के बनने में अहम भूमिका मानी जाती है. फिजिक्स के नियमों के मुताबिक धरती पर हर चीज को मास देने वाले यही कण हैं. लोगों को 1960 के दशक में इनके बारे में पहली बार पता चला. तब से ये फिजिक्स की अबूझ पहेली बने हुए हैं.

यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सर्न) के जिनीवा के पास स्थित फिजिक्स रिसर्च सेंटर के साइंटिस्टों का कहना है कि गॉड पार्टिकलों को उन्होंने खोज तो लिया है , लेकिन वे इनकी मौजूदगी का कोई ठोस सुबूत अभी पेश नहीं कर सकते. गॉड पार्टिकल का पता तब चला, जब एटलस और सीएमएस प्रयोगों से जुड़े साइंटिस्टों ने लार्ज हैड्रोन कॉलाइडर को तेज स्पीड में चलाकर कई कणों को आपस में टकराया. इस दौरान बोसोन के चमकते हुए अंश सामने आए, लेकिन उन्हें पकडऩा मुमकिन नहीं था. सीएमएस से जुड़े साइंटिस्ट ओलिवर बकमुलेर ने बताया, ये दोनों ही प्रयोग एक ही मास लेवल पर गॉड पार्टिकलों के वजूद का संकेत दे रहे थे. एटलस से जुड़ी रहीं साइंटिस्ट फैबिओला गियानोती के मुताबिक , 126 गीगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट के पास पाए गए हिग्स बोसोन की मात्रा काफी यादा हो सकती है , लेकिन इस बारे में कुछ भी दावे से कहने के लिए यादा स्टडी और आंकड़ों की जरूरत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हिग्स बोसोन के वजूद की पुष्टि आगे की रिसर्च में भी होती है , तो यह ब्रह्मांड के सभी मूलभूत तत्वों के रहस्यों को सामने लाने की शुरुआत होगी और यह पिछले 100 सालों में सबसे अहम खोज कही जाएगी. हालांकि , माना जा रहा है कि इस बारे में की जा रही रिसर्च का ठोस नतीजा अगले साल के अंत तक ही आ पाएगा.

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