(व्यापार प्रतिनिधि)
इन्दौर. 18 नवंबर, अस्थिर वैश्विक हालात के कारण 2010 की दूसरी तिमाही में सोने की मांग घटकर 180.4 टन ही रह गई थी, उसके बाद मांग में आई यह पहली गिरावट है. जिसके कारण सोने और चांदी के भावों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट आई है. एक दिन में चांदी दो हजार रुपए किलोतक टूटी है, वहीं सोना भी 300 रुपए गिरावट पर दर्ज हुआ.

वल्र्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) को उम्मीद हे कि चौथी तिमाही में शादी-ब्याह का मौसम शुरू होने से सोने की मांग में तेजी आएगी. भारत में आमतौर पर तीसरी तिमाही में सोने की मांग सुस्त ही रहती है, लेकिन इस बार ऊंचे भाव ने इसकी मांग को और घटा दिया है.

भारत में सोने की मांग ऐसे समय में घटी है जबकि वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 6 फीसदी बढ़कर 1,053.9 टन पर पहुंच गई है। मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर बने रहने के बावजूद भारत तीसरी तिमाही में भी सोने का सबसे बड़ा बाजार बना रहा। हालांकि 191.2 टन सोने की मांग के साथ दूसरे नंबर पर काबिज चीन भी ज्यादा पीछे नहीं है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी के कारण देश में सोने का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. इस तिमाही में सोने का अंतरराष्ट्रीय भाव 8.24 फीसदी बढ़ा है जबकि इसी अवधि में भारत में सोने के भाव में 18.35 फीसदी की तेजी आई है.

विदेशी एवं घरेलू वित्तीय बाजारों में आई अप्रत्याशित गिरावट के कारण सोने की मांग कम हुई है. रुपये में आई गिरावट से जिंसों के भाव बढ़ गए हैं। लेकिन देश में मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर बने रहने से इस पर दोहरी मार पड़ी है. सबसे ज्यादा गिरावट आभूषण क्षेत्र में आई है, जो मॉनसून में आमतौर पर सुस्त ही रहता है. आभूषण श्रेणी में इस अवधि में सोने की मांग 26 फीसदी घटकर 125.3 टन रह गई, जो 2010 की तीसरी तिमाही में 168.4 टन थी. निवेश के तौर पर भी सोने की मांग 18 फीसदी घटकर 78 टन रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 95.5 टन थी.

गुरुवार को सोना 175 रुपये गिरकर 28,965 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। लंदन में भी सोने का हाजिर भाव घटकर 1,745.88 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जो बुधवार का कारोबार समाप्त होने पर 1,763.38 डॉलर प्रति औंस था और आज यानि शुक्रवार को यह घटकर 1726.879 डालर प्रति औंस पर रह गया.

घबराए निवेशकों द्वारा जमकर बिकवाली और ऊंचे दाम के कारण देश में सोने की मांग 23 फीसदी घट गई है. बेहद अस्थिर बाजार में हाथ जलाने से बचने के लिए निवेशकों ने नई बुकिंग से भी परहेज किया। सितंबर में समाप्त हुई तिमाही में भारत की ओर से 203.3 टन सोने की मांग रही जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 263.9 टन था.

केवल कारोबारी दिग्गजों को रास आई सोने की चमक
सोने की कीमतों में आ रही चमक को देखते हुए आम लोग जहां इस महंगी धातु को खरीदने से परहेज कर रहे हैं वहीं घरेलू कंपनियां सोने में सुरक्षित निवेश का विकल्प तलाश रही हैं.

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गोल्ड एक्सचेंज टे्रडेड फंड (ईटीएफ) में कुल परिसंपत्तियों का करीब आधा हिस्सा (4,176 करोड़ रुपये) कंपनियों के पास है जो मार्च की तुलना में करीब तिगुनी है। मार्च के अंत तक कंपनियों का गोल्ड ईटीएफ बाजार 1,439 करोड़ रुपये का निवेश था. मौजूदा समय में कारोबारी निवेशकों के पास कुल गोल्ड ईटीएफ की 51 फीसदी हिस्सेदारी है.

जिसकी कीमत करीब 8,185 करोड़ रुपये है. चार साल पहले शुरू हुए गोल्ड ईटीएफ में कंपनियों की ओर से किया गया यह अब तक सबसे बड़ा निवेश है।

सोने और चांदी के भाव वाकई बहुत ज्यादा चल रहे है. इसमें कमी आना चाहिए. सटोरिये और बाजार के बड़े खिलाड़ी इसे आम लोगों से दूर करते जा रहे है. अब लोग जरुरत और परंपरा के लिहाज से हल्के वजन के जेवर पसंद करने लगे है. कीमती धातुओं में आई तेजी से फिजिकल ग्राहकी काफी प्रभावित हुई है, लेकिन निवेश के लिहाज से देखे तो लोगों का रुझान भी बना हुआ है. पिछले कुछ महीनों से कारोबारी दिग्गज सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में पैसा लगा रहे हैं. –कुंदन सोनी, व्यवसायी

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