मुंबई, 15 जनवरी. स्टैंडर्ड एंड पूअर्स द्वारा फ्रांस सहित नौ देशों की क्रेडिट रेटिंग घटाने से समूची दुनिया में हलचल मच गई है. पूरे विश्व में एक बार फिर मंदी का खतरा मंडरा रहा है.

ऐसे हालात में यूरो जोन की खस्ताहाल इकोनॉमी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले असर से भारत भी टूट सकता है. यूरो जोन की खस्ताहाल इकोनॉमी से होने वाले प्रभाव को लेकर भारत की भी चिंता बढ़ गई है. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी चेताया हैं इस मंदी का कुछ असर भारत पर भी असर पड़ सकता है. इधर, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने रेटिंग कम करने के पीछे तर्क दिया है कि यूरो मुद्रा के संकट को खत्म करने के लिए इन देशों की योजनाएं पर्याप्त नहीं है.
पुर्तगाल और स्पेन जैसी कमजोर अर्थव्यवस्थाएं पहले से अधिक आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती है. इसके कारण निवेशक यूरो मुद्रा वाले देशों की कर्ज में डूबी सरकारों तथा बैंकों से और भी दूरी बना सकते हैं.

आईटी और सर्विस सेक्टर को घाटा सबसे ज्यादा
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोजोन संकट का सबसे ज्यादा असर सर्विस सेक्टर पर दिखेगा, जिससे देश की जीडीपी दर भी कम हो सकती है. यूरोपीय देशों की हालत देखते हुए आईटी कंपनियों की आय में गिरावट आने की आशंका है. देश के कुल जीडीपी में सर्विस सेक्टर का 66 फीसदी हिस्सा है. इसमें 9.4 फीसदी हिस्सा आईटी सेक्टर से ही आता है.

यूरोप से होने वाला 26.5त्न कारोबार बुरी हालत में
आईटी कंपनियों के कुल निर्यात का 20.2 फीसदी हिस्सा यूरोपीय देशों को होता है. 2009-10 में कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में से 26.5 फीसदी यूरोप को किया गया था. वहीं, अमेरिका का कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में 61 फीसदी हिस्सा है.

बाजार के लिए आगे खतरों का बवंडर
खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट, औद्योगिक उत्पादन में सुधार और रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद पर लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त में रहे घरेलू शेयर बाजार के लिए आगे हालात जोखिम भरे हो सकते हैं। ऋण साख निर्धारित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था स्टैंडर्ड एंड पुअर्स का फ्रांस की शीर्ष ऋण साख ट्रिपल ए से घटाकर डबल बी प्लस करने और कई अन्य यूरोपीय देशों की साख को भी नीचे पायदान पर ले जाने का फैसला वैश्विक बाजारों के साथ ही घरेलू शेयर बाजार पर भी भारी पड़ सकता है।

आलोच्य सप्ताह बीएसई का सेंसेक्स 286.89 अंक की बढ़त लेकर 16,000 के स्तर से उपर 16154.62 अंक पर और नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 111.90 अंक उपर 4868 अंक पर रहा। बीएसई का मिडकैप और स्मालकैप भी क्रमश 6.14 प्रतिशत और 8.19 प्रतिशत बढ़त में रहे। खाद्य मुद्रास्फीति दर 31 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में एक सप्ताह पहले के 3.36 प्रतिशत नकारात्मक के मुकाबले 2.90 प्रतिशत नकारात्मक रही। 2011 में मुद्रास्फीति लगभग नौ प्रतिशत से ऊपर रही थी, लेकिन दिसंबर 2011 के अंतिम दो सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति ऋणात्मक स्थिति में आ गई है। विनिर्माण क्षेत्र की रिकवरी की बदौलत नवम्बर-2011 में औद्योगिक उत्पाद सूचकांक भी अक्टूबर के ऋणात्मक 4.74 प्रतिशत के मुकाबले सुधरकर कर 5.9 प्रतिशत हो गया। बाजार के लिए यह खबरें फायदे की साबित हुईं।समीक्षाधीन सप्ताह पांच में से तीन कारोबारी दिवस बाजार तेजी में और दो दिन नुकसान में रहे। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के पीछे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के असर और गिरावट से सुधरे रूपए की बड़ी भूमिका रही।

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