नई दिल्ली, 12 अक्टूबर. जनलोकपाल विधेयक के लिए अभियान चलाने वाले गांधीवादी अन्ना हजारे की प्रमुख सहयोगी किरण बेदी ने सरकार के लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के कदम पर सवाल खड़ा करते हुए  कहा कि यह विधेयक के पारित होने में विलंब करने या उससे बचने और लोगों को मूर्ख बनाने का एक सुनिश्चित तरीका है।

किरण बेदी ने आगे कहा कि संवैधानिक दर्जा इसे  खत्म करने का तरीका है क्योंकि इसके लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है जो लालू एवं मायावती के रहते और ज्यादा कठिन होगा। किरण बेदी ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट पर कहा कि यदि सरकार शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक लाने के प्रति गंभीर है तो उसे सबसे पहले लोकपाल विधेयक पर मतदान करवाना चाहिए। संवैधानिक दर्जा इसे टालने या बचने का एक सुनिश्चित तरीका है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार इसे संवैधानिक दर्जा तब देगी जब उनके पास पर्याप्त संख्या बल होगा। लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की बात बग्घी के आगे घोड़ा लगे होने जैसा है। यह कल्पना में बनाए जाने वाले केक के लिए ब्रेड नहीं होने के समान है। वे किसे मूर्ख बना रहे हैं?इससे पहले कल केंद्रीय विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने लोकपाल को एक ऐसा संवैधानिक निकाय बनाने की बात कही है जो चुनाव आयोग से अधिक शक्तिशाली होगा। खुर्शीद ने कहा कि हम एक बहुत मजबूत लोकपाल विधेयक के मसौदे पर काम कर रहे हैं। लोकपाल विधेयक संविधान संशोधन के साथ आएगा इस संशोधन से लोकपाल का दर्जा संवैधानिक प्राधिकार का हो जाएगा।

इसके लिए अगले माह शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा और लोकपाल विधेयक के इसी सत्र में पारित हो जाने की उम्मीद है।लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की यह पहल कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के पिछले माह समाप्त हुए संसद के अधिवेशन के दौरान दिए गए इस आशय के सुझाव के मद्देनजर हुई है।किरण बेदी ने उम्मीदवार को नामंजूर कर दिए जाने का अधिकार  पर कहा कि यह कांग्रेस को न केवल हिसार बल्कि हर जगह मदद करेगा। इससे पहले कल मजबूत लोकपाल विधेयक के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हजारे से चुनाव सुधार के लिए राइट टू रिजेक्ट की उनकी मांग के संदर्भ में कहा था कि इसके लिए राजनीतिक सहमति की जरूरत है।

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