मदुरै, 25 सितंबर. करोड़ों रुपये के ग्रेनाइट की अवैध खुदाई के मामले में मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री एमके अलागिरी के पुत्र दुरई दयानिधि के अग्रिम जमानत का अनुरोध खारिज कर दिया।

दयानिधि और नौ अन्य पर आरोप है कि उनके स्वामित्व वाली कंपनियों ने अनुमति लिए बिना रेत और ग्रेनाइट की खुदाई की।  मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति मतीवनन ने भी दयानिधि के कारोबारी साझीदार एस नागराजन तथा अग्रिम जमानत के लिए अनुरोध और खान विभाग के उप निदेशक शनमुगावल का जमानत संबंधी आवेदन खारिज कर दिया।  अदालत ने ग्रेनाइट कंपनी के एक मालिक और अलागिरी के पुत्र का अग्रिम जमानत का आग्रह खारिज कर दिया लेकिन कंपनी के मालिक की पत्नी को राहत दे दी। मदुरै के पूर्व कलेक्टर यू सहायम ने एक रिपोर्ट में, अवैध खनन से 16,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जिसके बाद सरकार ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

15 सितंबर को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारियों ने दो आईएएस अधिकारियों को कथित भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लिया और राज्य में 34 जगहों पर छापे मारे। दोनों आईएएस अधिकारी मदुरै के पूर्व जिला कलेक्टर क्रमश: एन मतीवनन और सी कामराज हैं। पुलिस ने आव्रजन अधिकारियों को सतर्क कर दिया कि दयानिधि और अन्य आरोपियों की देश छोडऩे न दिया जाय । कंपनियों के खाते भी सील कर दिए गए। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु मिनरल्स लिमिटेड के तीन अधिकारियों ने कहा कि दयानिधि और अन्य आरोपियों ने उनके साथ मिल कर ग्रेनाइट के ब्लाकों की अवैध खुदाई का षड्यंत्र रचा था। तीनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारी ने कहा कि याचिकाकर्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर ही अधिकारियों की भूमिका का पता चल सकता है। 25 गवाहों से पूछताछ करने पर षड्यंत्र, अतिक्रमण, शर्तों के उल्लंघन आदि का पता चला है। जांच अधिकारी ने यह भी कहा कि दयानिधि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले व्यक्ति हैं और अग्रिम जमानत मिलने पर वह गवाहों को डरा धमका सकते हैं जिससे जांच प्रभावित होगी।

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