सफल परीक्षण कर डीआरडीओ ने रचा इतिहास

धामरा (ओडिशा), 19 अप्रैल. भारत ने गुरुवार सुबह 8 बजकर 07 मिनट पर परमाणु क्षमता से लैस और स्वदेशी तकनीक से विकसित मिसाइल अग्नि-5 का पहला सफल परीक्षण किया.

5000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली इस मिसाइल का ओडिशा के व्हीलर द्वीप से प्रक्षेपित कर परीक्षण किया गया. रक्षा सूत्रों के अनुसार, तीन चरणों में ठोस प्रणोदक से चलने वाली अग्नि-5 को एकीकृत परीक्षण क्षेत्र के परिसर 4 से प्रक्षेपित किया गया. उन्होंने बताया कि प्रक्षेपण के बाद यह आकाश में सीधे उड़ान भरने लगी. प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने इसे मील का पत्थर करार दिया है. अग्नि-5 का सफल परीक्षण एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम में भारत की लंबी छलांग को प्रदर्शित करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की विशेषताओं वाला है. अभी सिर्फ अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के पास ही आईसीबीएम को प्रक्षेपित करने की क्षमता है.

सतह से सतह पर वार करने वाला अग्नि-5 पांच हजार किमी. दूर तक निशाना लगा पाने में सक्षम है. यह 17 मीटर लंबा और दो मीटर चौड़ा है. इसका भार करीब 50 टन है. यह उन्नत मिसाइल एक टन से ज्यादा परमाणु सामग्री को ढो सकता है. 15 नवंबर 2011 को इसी प्रक्षेपण स्थल से 3500 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाले अग्नि-4 के पहले विकास परीक्षण के सफल नतीजों के बाद अग्नि-5 की तैयारियों ने गति पकड़ी. डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार वीके सारस्वत के अलावा शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक, सैन्य अधिकारी और संबंधित एजेंसियों के अधिकारी प्रक्षेपण स्थल पर मौजूद थे. रक्षा सूत्रों ने बताया कि अग्नि-5 के सफल परीक्षण में 800 वैज्ञानिक, कर्मी और सहायता कर्मचारी शामिल थे. परियोजना से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया कि स्वदेश निर्मित अग्नि श्रेणी के अन्य मिसाइलों के विपरीत अग्नि-5 सबसे उन्नत संस्करण है. जिसमें कई नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है. आज के सफल परीक्षण के बाद भारत लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक रखने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शुमार हो गया है.

मील का पत्थर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने  सफल परीक्षण की सराहना करते हुए इसे देश की सुरक्षा की तलाश, तैयारियों और विज्ञान में नए क्षेत्रों का पता लगाने की दिशा में एक और मील का पत्थर करार दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा अन्य संगठनों के सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने देश की रक्षा और सुरक्षा को सशक्त बनाने के हमारे प्रयासों की दिशा में अनथक प्रयास किया.

बड़ी सफलता

रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने परीक्षण प्रक्षेपण को ‘बड़ी सफलताÓ और ‘महत्वपूर्ण मील का पत्थर’ बताया. एंटनी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख डॉ. वीके सारस्वत को फोन करके बधाई दी और कहा, ‘आज राष्ट्र का गौरव और बढ़ गया है. हम उन संभ्रांत देशों के क्लब में शामिल हो गए हैं जिनके पास आईसीबीएम क्षमता है.’

चिढ़ गया चीन

पेइचिंग, भारत ने अपनी सबसे ताकतवर और पहली इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का कामयाब टेस्ट क्या किया, पड़ोसी चीन का मीडिया इससे बौखला गया है. एक चीनी अखबार ने अग्नि 5 के टेस्ट के बाद पहली प्रतिक्रिया में लिखा है भारत को इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा और न्यूक्लियर हथियारों के मामले में भारत चीन के आगे कहीं नहीं ठहरता है. हालांकि चीन की आधिकारिक प्रतक्रिया काफी सधी हुई है. चीन सरकार ने कहा कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं सहयोगी हैं.

उठाए सवाल

अग्नि 5 के टेस्ट पर चीन ने भारत की मिसाइल क्षमता पर सवाल उठाए हैं. अखबार में कहा गया है कि भारत अग्नि 5 से आईसीबीएम क्लब में शामिल होने के दावे कर रहा है. अग्नि 5 मिसाइल केवल पांच हजार किलोमीटर तक ही मार कर सकती है, जबकि इंटरकॉन्टिनेंटल बलिस्टिक मिसाइल  की रेंज 8 हजार किलोमीटर होती है.

भारत गरीब मुल्क और…
यही नहीं अखबार में भारत को गरीब मुल्क बताते हुए ताना कसा गया है, भारत अभी भी गरीब मुल्क है. इंफ्रास्ट्रक्टर और निर्माण के क्षेत्र में वह पीछे है, लेकिन वहां की सोसायटी न्यूक्लियर वेपन की वकालत करती है. पश्चिमी देश भारत की इस हथियारों की होड़ पर चुप हैं. 2012 में भारत का रक्षा खर्च 17 पर्सेंट बढ़ा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया है.

अग्नि 5 से कुछ हासिल नहीं होगा

भारत को  चेतावनी देते हुए लिखा गया है, अगर यह मिसाइल चीन के अधिकतर हिस्सों को टारगेट करने में भी सक्षम है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि भारत विवादित मुद्दों पर कुछ हासिल कर लेगा. भारत को पता होना चाहिए कि चीन की परमाणु क्षमता कहीं ज्यादा मजबूत है. भारत हथियारों के मामले में चीन के आगे कहीं भी नहीं ठहरता है.ेि

पाक में छाया

अग्नि-5 के सफल परीक्षण के मिनटों बाद ही पाकिस्तानी वेब साइट्स पर यह खबर छा गई. समाचार में एक रक्षा सूत्र के हवाले से कहा गया है कि यह मिसाइल चीन में किसी भी स्थान पर एक टन परमाणु मुखास्त्र पहुंचाने में सक्षम है.

खतरा नहीं : नाटो

नाटो भारत के आधुनिक मिसाइल विकास कार्यक्रमों के बावजूद उसे मिसाइल खतरा नहीं मानता है. नाटो महासचिव एंडर्स फोग रासमुसेन ने यह बात कही. समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक भारत ने गुरुवार को ही 5,000 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता वाली स्वदेशी अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया.

बंगाल की खाड़ी में व्हीलर्स द्वीप से इस मिसाइल का परीक्षण किया गया. तीन चरणों वाली इस मिसाइल में ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया गया है. अग्नि-5 मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद भारत अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) रखने वाले अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन व फ्रांस जैसे देशों के समूह में शामिल हो गया है. ब्रसेल्स में नाटो मुख्यालय पर एक संवाददाता सम्मेलन में रासमुसेन ने कहा कि उनका गठबंधन भारत को नाटो सहयोगियों व इस क्षेत्र के लिए खतरा नहीं मानता.

Related Posts: