नई दिल्ली, 8 नवंबर. लोकपाल विधेयक पर आंदोलन की बागडोर संभालने के टीम अन्ना के वादे के बाद अपना आमरण अनशन खत्म करने वाले 94 साल के गांधीवादी शंभू दत्त को अब अफसोस हो रहा है कि आखिर क्यों उन्होंने अपनी लड़ाई अन्ना हजारे और जी हुजूरियों की उनकी कोर कमिटी को सौंप दी।

गांधियन सेवा ऐंड सत्याग्रह ब्रिगेड के महासचिव दत्त अपने पांच सहयोगियों के साथ पिछले साल 30 जनवरी को लोकपाल मुद्दे पर आमरण अनशन पर बैठे थे। इस मुद्दे पर आंदोलन करने वालों में वह अव्वल थे। दत्त ने कहा, किरन बेदी और स्वामी अग्निवेश ने हमसे अनशन खत्म करने की विनती की और वचन दिया कि हमारे विरोध को वह आगे बढ़ाएंगे। पीछे मुड़कर देखने पर मुझे लगता है कि हमें अपना अनशन वापस नहीं लेना चाहिए था। हम अपने संकल्प के प्रति अधिक गंभीर थे। टीम अन्ना की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि हजारे की कोर समिति के सदस्यों में दमखम नहीं है।

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