ईश्वर ने हम सभी को खुश रहने की क्षमता दी है, लेकिन कभी-कभी हम स्वयं ही अपनी गलत सोच और दूषित विचारों के कारण अपने आप को दुखी कर लेते है। लगने लगता है कि खुशियां हमारे पास क्यों नहीं है। सब कुछ होते हुए भी मन में खुशी नहीं होती। ऐसे में जरूरत होती है अपनी जीवन शैली में परिवर्तन लाने की। खुशी सदैव हमारे मन में छुपी होती है, बस जरूरत होती है उसे अपने अंदर से खोज निकालने की।


जिएं नियमित व सहज जीवन

अपनी दिनचर्या के सभी कार्यो के लिए समय निश्चित करे। एक निश्चित समय पर सोना, उठना, भोजन, सैर और एक्सरसाइज करना- ये काम मुश्किल अवश्य लग सकते है परंतु नामुमकिन नहीं। ऐसा करने से कुछ दिनों के बाद जब आपका पाचन-तंत्र, ब्रीदिंग सिस्टम ठीक हो जाएगा, मांसपेशियों में लचीलापन रहेगा तो आप अच्छा व स्वस्थ महसूस करेगी।

अपने आपसे प्यार करें

यदि आप खुशियों से दोस्ती करना चाहती है तो सबसे पहले अपने आप से प्यार करे। जब भी आप अपनी नियमित दिनचर्या का पालन करने में सफल हो जाएं तुरंत खुद को शाबाशी दें व अपनी इस सफलता की चर्चा मित्र मंडली में अवश्य करे, उनकी सुखद प्रतिक्रिया आपकी खुशी को चार चांद लगा देगी।

सदैव मस्त रहें

उम्र चाहे बचपन की हो या पचपन की, हमेशा मस्त रहे। अपनी रुचि का कोई भी रचनात्मक या सृजनात्मक कार्य करें। हमारी निराशा व अवसाद का मूल कारण प्राय: खाली रहकर व्यर्थ की बातें सोचना होता है। जब आप किसी रचनात्मक कार्य में मस्त होती है, उस समय मन-मस्तिष्क से ऐसे रासायनों का स्त्राव होता है, जो आपको खुशी देता है। मस्त रहने से मन में अच्छे विचारों का संचार होता है।

परिवर्तन को सहर्ष स्वीकारें

समय के साथ पारिवारिक, सामाजिक दायरों में परिवर्तन हर उम्र, हर माहौल में जरूरी है। ऐसे परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करे। हर वक्त यही जुमला न दोहराएं कि-अरे हमारे जमाने में तो ये काम ऐसे होता था। परिवर्तन जीवन का मूल मंत्र है। सामने वाले से बदलने की उम्मीद करने से बेहतर है खुद को बदलें व उस माहौल में खुश रहे।

मेलजोल बढ़ाएं

समान विचारों वाले लोगों से दोस्ती करके परस्पर विचारों का आदान-प्रदान करे। इससे मन को ताजगी मिलेगी व विचारों को नई दिशा। आपसी मेलजोल मन में खुशी का संचार करता है। अपने मेलजोल को उम्र की सीमा में न बांधें। कई बार अपने से अधिक उम्र के लोगों के ज्ञान व अनुभव से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है तो कई बार छोटे लोग भी पते की बात कर देते है। बस, अपने ज्ञान में इजाफा करती रहे व खुश रहे।

किसी से अधिक अपेक्षा न रखें

कहते हैं अपेक्षाएं खुशियों की दुश्मन होती हैं जब हम किसी से आशा रखते है और वह उम्मीद पूरी नहीं होती तो हम दुखी हो जाते है। हालांकि ये बात कुछ मुश्किल लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे जब किसी से उम्मीद न रखने की आदत को आप अपना लेंगी, आपका जीवन में खुशियों से भर उठेगा।

संगीत सुनें

संगीत में बड़ी शक्ति होती है। जब कभी भी मन उदासी से घिरने लगे तो संगीत को साथी बना लें। अपना मनपसंद संगीत सुनकर आपका मन कुछ ही देर में खुशी से भर जाएगा।

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