सहारा ग्रुप के चेयरमेन सुब्रतो राय का संदेश

नई दिल्ली, 8 जुलाई. सुंदर और संतुष्ट जीवन व्यक्ति के हाथ में हैं. जीवन की सारी खुशियां स्वयं उसी के हाथ में है. जीवन के सभी पहलुओं को जानते हुए व्यक्ति जीवन जीता है तो वह केवल सफल ही नहीं होता खुश और संतुष्ट भी रहता है.

यह संदेश है सहारा ग्रुप के चेयरमेन सुब्रतो राय याने सहाराश्री का. सहाराश्री ने रविवार को सहारा वन और सहारा समय पर प्रसारित अपने संदेश में कर्मचारियों के साथ लोगों को सुंदर और संतुष्ट जीवन जीने का मार्ग बताया. इसके साथ ही उन्होंने कर्मचारियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया. अपने संदेश में सहाराश्री ने कहा कि जीवन सुंदर हो इसके लिए जानना जरूरी है हमारी चाहत क्या है? किससे संतुष्टि होगी? इसमें सबसे पहले बारी आती है ये सुरक्षा की. किन बातों की सुरक्षा? ये हैं प्राण, सम्मान, प्यार, स्वास्थ्य और धन. ये पांचो जब सुरक्षित होते हंै तब हमारी इच्छा होती है ये हमें और मिल. ये पाने के लिए आप क्या नहीं करते? यही जीवन है. प्राण की सुरक्षा- इसे पाने के लिए व्यक्ति सब कुछ करता है, प्रथम प्राथमिकता है. स्वास्थ्य सुरक्षा – डॉक्टर के पास जाता है, प्रणायाम करता है, योग करता है.

धन की सुरक्षा – धन को कोई खोना नहीं चाहता, खर्च करके के भी उससे कुछ पाना चाहता है. पार्टी करता है तो सम्मान की सुंतष्टि मिलती है. मनुष्य इसे खोना नहीं चाहता. सम्मान की सुरक्षा -ऐसा कोई काम न करूं की असम्मानित हो जाऊं. प्यार की सुरक्षा – ये बात मनुष्य को समझ नहीं आती है जो इस बात को समझ लेगा वो अपने जीवन को संतुष्ट बना लेगा. प्यार की संतुष्टि हमारे लिए अमृत है और संतुष्टि जहां वहां जीवन सुंदर है.
सूचना, संकल्पना और अभिव्यक्ति ज्ञान के लिए आवश्यक  – अब बारी आती है ज्ञान की. ज्ञान तीन बातों पर निर्भर है सूचना, संकल्पना (कनसेप्शन) और अभिव्यक्ति पर. ज्ञान के लिए आवश्यक है व्यक्ति के पास ताजा और सही सूचना हो. संकल्पना अर्थात वह कब, कैसे, कहां, क्यों और किसकी वजह से हुई पता हो. इसके बाद उसकी अभिव्यक्ति भी सही होना चाहिए. यहां अभिव्यक्ति का मतलब केवल बातों से नहीं बल्कि सही निर्णय से भी है. सही निर्णय ही व्यक्ति को सफलता दिलवाता है. अभिव्यक्ति के लिए अभ्यास की आवश्यकता है. उदाहरण के लिए क्रिकेट सुनने या केवल देखभर लेने से नहीं खेला जा सकता है. इसके लिए मैदान में जाकर प्रक्टिस करना होगी. अगर ज्ञान को उत्पादक बनाना है तो तीनों बातों की आवश्यकता है. ज्ञान अथाह सागर है. ज्ञान उजाला है, अज्ञान अंधेरा है. ज्ञान के अभाव में व्यक्ति पिछड़ जाता है और दु:खी हो जाता है. इसलिए जो व्यक्ति अपने आप को ज्ञानी समझ बैठा है वह सबसे बड़ा अज्ञानी है.

सफल जीवन का आधार मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन –  सफल जीवन आधार है मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन. व्यक्ति के जीवन में ये तीनों चीज नींव के समान  है. जिस भी व्यक्ति के जीवन में ये तीनों चीज नहीं है वो सफल नहीं हो सकता. बिल्डिंग बनाने के लिए मजबूत नींव जरूरी है ठीक उसी प्रकार सफल जीवन के लिए ये तीनों चीजें जरूरी है. ये व्यक्ति के जीवन की नींव होती है. लेकिन केवल इन तीनों चीजों के आधार पर ही जीवन सफल नहीं हो सकता क्योंकि ये काम तो ठेले वाले या अन्य मजदूर भी करते हैं. इसके साथ जरूरत होती है व्यक्तित्व की. व्यक्तित्व व्यक्ति खुद बनाता है. व्यक्तित्व व्यक्ति को नहीं बनाता. इसके लिए जरूरी है ज्ञान.

मनुष्य हर काम अपने लिए करता है
ज्ञान चार प्रकार के होता है जीवन पक्ष का ज्ञान, कर्म विषय का ज्ञान, कर्मस्थल का ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान. जिसको भी ये पूरा ज्ञान होगा वो जरूर सफल होगा. जीवन पक्ष के ज्ञान से मतलब है जीवन की सच्चाई और जीवन की सच्चाई यह है कि हम किसी के लिए कुछ भी नहीं करते है, अपने लिए करते हैं. स्वास्थ्य, मान-सम्मान, प्यार आदि चीजों के लिए करते हैं. कोई उपकार नहीं करता, न ही त्याग करता है. हमें रोज सीखना चाहिए जीवन की छोटी-छोटी बातों से. अगर आप ये नहीं करोगे तो मानसिक स्तर पर कमजोर हो जाओगे.

मानसिक स्तर पर कमजोर हो जाओगे तो शारीरिक स्तर भी. इसलिए मनुष्य जो कुछ कर रहा है वह अपने लिए और भावनात्मक संतुष्टि के लिए कर रहा है. ये सच्चाई समझ में आ जाएगी तो जीवन सुंदर हो जाएगा. अपेक्षा जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन है. इसी में सभी मारे जाते हैं. लोग गलतफहमी में जी रहे हैं कि हम दूसरों के लिए कर रहे हैं. जो जीवन में इस सच्चाई को समझ जाता है वह दूसरों को देने में सुख प्राप्त करने लगता है.
कर्म विषय के ज्ञान से तात्पर्य है व्यक्ति यह कार्य क्यों और किसलिए कर रहा है. इसके लिए तो यही कहूंगा कि हर व्यक्ति के पास ऊर्जा और विवेक है. वह सही दिशा में कार्य करे तो निश्चित ही आगे बढ़ेगा.

कर्मस्थल के ज्ञान से तात्पय है कि जिस संस्था में भी आप काम कर रहे हो वहां की आपको संपूर्ण जानकारी होनी जाहिए ताकि आप दूसरों की अपनी संस्था की सही जानकारी दे सके. यदि नहीं होगी तो दूसरा व्यक्ति आपको और संस्था दोनों को संदेह की नजर से देखेगा. अगर आपका कर्मस्थल से जुड़ाव नहीं होगा तो सफल कैसे बनोगे? व्यवहारिक ज्ञान से आशय है काम करने का तरीका. इसे दो भागों में समझ सकते हैं व्यक्तित्व का प्रभुत्व व पद का प्रभुत्व. सफल वही व्यक्ति हो सकता है जो अपने व्यक्तित्व के प्रभुत्व का इस्तेमाल करता है.

व्यक्तित्व का प्रभुत्व जिसके पास होता है उसे पद का भी डर नहीं होता है. जबकि पद के प्रभुत्व में आदमी डरता है कि मेरे पास पद नहीं रहेगा तो क्या होगा? इसलिए व्यक्तित्व के प्रभुत्व को बढ़ाओ. भावनात्मक लगाव के साथ अपने आपको उठाओगे तो सफल हो जाओगे. बड़ा जीवन जीना है तो अंदर से डरो, वहां ईमानदार बनो, वहां डरोगे तो जीवन में कहीं नहीं डरना पड़ेगा.

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