भोपाल, 3 जून. शंकरचार्य नगर में चल रहे श्रीसिद्घ चक्र विधान में गीत संगीत के माध्यम से भक्ति में लीन रहे भोपालवासी. दूसरे दिन आचार्य निमंत्रण के कार्यक्रम में छुल्लक सुकाय सागर प्रतिष्ठïाचार्य, श्री विनोद साग, श्रीपाल भैयाज एवं पं. मनीष शास्त्री का सम्मान आयोजन समिति के मनोज जैन, महेन्द्र जैन वीरेंद्र अजमेरा, प्रदीप जैन कुट्ïटू, सुरेश जैन आदि ने किया. इससे पूर्व संध्या में महाराष्टï्र से आये कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.

महाआरती कर्ता विनोद जैन परिवार सहित हाथी पर सवार होकर आयोजन स्थल पहुँचकर भगवान जिनेन्द्र की महाआरती की गई. प्रवक्ता प्रवीण जैन के अनुसार उपस्थित श्रद्घालुओं द्वारा पूजन भक्ति की गई. पांडाल में उपस्थित सभा इन्द्र इन्द्राणियों ने नृत्य एवं आरती कर भक्ति की. मुनिश्री से आशीर्वाद लेने दूर-दूर से लोग आए.

इस अवसर पर मुनिश्री 108 सुबल सागर महाराज द्वारा दिए गए मंगल प्रवचनों में बताया कि मानव जीवन में प्रति क्षण जो घट रहा है जो दिख रहा है क्या वह सत्य है. जैन दर्शन भाव प्रधान धर्म है. जिसकी भावना भव नाशिनी है. अभव्य जीव कभी मोक्ष नहीं जा सकता. अभक्ष्य एवं घडत भोज नरक निगोद में ले जाने वाले है. प्राणी मात्र पर रक्षा के भा रखो, हर जीव जीना चाहता है सभी को जीने दो. जियो और जीने दो की सिद्घता महावीर स्वामी ने प्रकट की अत: महावीर को जो सच्ची भावना से मानता है वही सच्चा मोक्ष मार्गी है. लोग महावीर स्वामी ने प्रकट की अत: महावीर को जो सच्ची भावना से मानता है वही सच्च मोक्ष मार्गी है. लाग्ेा महावीर को तो मानते है पर महावीर की कही जिनवाणी को नहीं मानते. हम राम एवं हनुमान को माने परंतु साथ ही उनकी कही वाणी को भी माने.
शोभायात्रा निकाली-लालवानी प्रेस रोड स्थित श्री 1008 सीमंधर जिनालय के चौदहवें वार्षिकोत्सव के अवसर पर डालचंद कमलबाई सार्वजनिक न्यास एवं दि. जैन मुमुक्षु मंडल, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय आध्यात्मिक शिक्षण शिविर एवं इन्द्रध्वज महामंडल विधान के मंगल आयोजन का शुभारंभ जैनमती धर्मशाला गूजरपुरा में इन्द्र इन्द्राणियों द्वारा मंगल कलश एवं अष्टï प्रातिहार्य की स्थापना की गई. विभिन्न प्रांतों से इस आयोजन में भाग लेने अनेक आध्यात्मक मर्मज्ञ विद्वान पधारे, प्रवचनमाला का हुआ शुभारंभ.
अ.भा. जैन युवा फेडरेशन भोपाल के कार्याध्यक्ष जितेन्द्र सोगानी ने बताया कि मंगल कलश एवं भगवान आदिनाथ की शोभायात्रा धूमधाम एवं बाजे गाजों के साथ निकाली गई. इसमें इन्द्राणियां बनी महिलाएं केशरिया परिधान में मस्तक पर मंगल कलश धारण कर भजन गाते हुए चल रही थी, इन्द्रगण श्रद्घालुजन श्वेत परिधान में उत्साह के साथ भगवान की भक्ति एवं नृत्य करत ेहुए भगवान की पालको के साथ जयकारे लगाते हुए चल रहे थे. यह शोभायात्रा सीमंधर जिनालय से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए जैनमती धर्मशाला गूजरपुरा पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई जहाँ पवन जैन आईपीएस भोपाल द्वारा विधान का उद्ïघाटन एवं डा. प्रवीण जैन डायरेक्टर म.प्र. भोज वि.वि. द्वारा शिविर का उद्ïघाटन किया गया. इस अवसर पर परमागन ग्रंथ पर आयोजित प्रवचन में सनावद से पधारे प्रतिष्ठïाचार्य बा.ब्रम्ह. पं, जतीशचंद्र शास्त्री ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जो विषय कषाय की प्रवृत्ति को छोड़कर निष्काम भाव से वीतराग परमात्मा की भक्ति व आराधना करता है, इससे उसकी कषाय मंद होने से पाप स्वयं क्षीण हो जाताहै एवं शुभ भावों से सहज पुण्य बंधता है. पुण्योदय से बाह्यï अनुकूल संयोग बनते हैं और प्रतिकूलताएं स्वत: समाप्त हो जाती है. अत: भक्त को हमेशा निष्काम भक्ति की भावना रखना चाहिए. आज इस अवसर पर मंडल के अध्यक्ष सुभाषचंद चौधरी, अरविंद बामौरा, अजय सोगानी सहित गणमान्य लाग्ेा उपस्थित थे.

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