चेन्नई, 26 जून. ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर डेनिस लिली ने आज सचिन तेंदुलकर से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्होंने इस महान बल्लेबाज को एमआरएफ पेस फाउंडेशन में लेने से इंकार करके क्रिकेट पर एहसान किया. तेंदुलकर तेज गेंदबाज बनने की उम्मीद में 1987 में एमआरएफ पेस फाउंडेशन गये थे लेकिन तब इसके कोचिंग निदेशक लिली ने उन्हें सलाह दी थी कि वह गेंदबाजी के बजाय अपना ध्यान बल्लेबाजी पर लगायें.

जब उनसे तेंदुलकर से हुई पहली मुलाकात के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच कहूं तो मैं काफी शर्मिंदा हुआ था कि मैंने बतौर तेज गेंदबाज उसे खारिज कर दिया था. लिली 25 साल की सेवा के बाद एमआरएफ को अलविदा कहेंगे. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मैंने उसके लिये और खेल के लिये अच्छा काम किया था. मैं मजाक कर रहा हूं, लेकिन मैं उस घटना को कभी भूलूंगा नहीं. उन्होंने कहा कि जब वह एक साल बाद आया तो वह सिर्फ 15 साल के करीब था. मैं नेट में उसके पीछे था. सचिन ने पहली गेंद को चौके के लिये भेज दिया. अगली गेंद पर भी उसने चौका लगाया था. गेंदबाज उसे समझ नहीं पा रहे थे और वह पार्क के चारों ओर हिट कर रहा था.

लिली ने कहा कि वह जब करीब 12 गेंद में 48 रन के करीब बल्लेबाजी कर रहा था तो मैंने तब के मुख्य कोच टीए शेखर से पूछा कि यह लड़का कौन है. शेखर हंसे और जवाब दिया कि आपको याद होना चाहिए, यह वही लड़का है जिसे आपने तब मना कर दिया था जब वह तेज गेंदबाज बनना चाहता था. उन्होंने कहा कि मैं भाग्यशाली था कि मैंने उसे टेस्ट क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय आगाज करने से पहले ही देख लिया था और तभी मुझे पता चल गया था कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों में शुमार होगा.

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