सिरदर्द कोई रोग नहीं है बल्कि महज एक लक्षण है. कई घातक बीमारियों की वजह से भी सिर दर्द हो सकता है. पीएमसीएच में न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष (प्रो.) डॉ. अरुण कुमार अग्रवाल बताते हैं कि सिर दर्द एक ऐसी समस्या है, जिससे प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य प्रभावित रहता है. इसे मामूली समझकर छोड़ा जाना कभी-कभी घातक साबित हो सकता है.

सिरदर्द के कारण

सिरदर्द कई कारणों से हो सकता है. डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सिरदर्द में माइग्रेन एक सामान्य कारण है. इसमें दर्द बहुत तेज होता है और आमतौर पर यह युवाओं में होता है. उम्र बढऩे के साथ-साथ यह स्वत: कम हो जाता है.

सिर दर्द की समस्या

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सिरदर्द कई प्रकार के होते हैं तथा इसके अलग-अलग कारण हैं. कुछ सिरदर्द बिल्कुल सामान्य कारणों से हो सकता है, जैसे-चिंता, रात में पूरी नींद नहीं लेना तथा थकावट आदि.

थोड़ी-बहुत सावधानी एवं आराम से इस तरह का सिर दर्द स्वत: ठीक हो जाता है, लेकिन वैसे सिरदर्द जो रोज-रोज सता रहा हो तब परेशानी बढ़ जाती है. कभी-कभी सिरदर्द के साथ उल्टी तथा बेहोशी होना, चमकी आना, आंख की रोशनी में कमी, बुखार, दर्द की वजह से दो-तीन बजे सुबह में नींद खुलना, शरीर का कोई अंग शिथिल पडऩा, सिर पर हथौड़े जैसा चोट का अहसास जैसे लक्षण हों तब इसे कभी भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए. इस हालत में तत्काल चिकित्सक से संपर्क करनी चाहिए. सिरदर्द की वजह में साधारण चिंता से लेकर ब्रेन हैमरेज, ब्रेन ट्यूमर और मेनिन्जाइटिस जैसी घातक बीमारियां शामिल हैं.

माइग्रेन के लक्षण हैं-

दर्द शुरू होने के पहले आंख के सामने जुगनु सा चमकना, अंधेरा के आगे पर्दा जैसा आना, शरीर के कुछ अंगों में झुनझुनी आना, उल्टी आदि. इसका दर्द काफी तेज होता है और मरीज रोशनी में नहीं रह सकता है. सिरदर्द में ब्रेन हैमरेज सबसे घातक है. ब्रेन हैमरेज की स्थिति में काफी तेज दर्द होता है और मरीज बेहोश हो जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे शरीर का कोई न कोई अंग शिथिल हो जाता है. इसी तरह बुखार के साथ दर्द मेनिन्जाइटिस का लक्षण हो सकता है.

टीवी का मेनिन्जाइटिस बेहद घातक है. अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तब मरीज में अंधापन या लकवा का भी खतरा रहता है. दर्द के साथ उल्टी हो रही है तब ब्रेन में फोड़ा, ट्यूमर, सूजन या चोट हो सकता है. ट्यूमर या फोड़ा इसमें जांच पड़ताल कर यथोचित इलाज जरूरी है. यह दर्द विशेषकर दो-तीन बजे सुबह उठता है. सिर में हल्की चोट भी कभी-कभी परेशानी का कारण बन सकती है. इसमें आमतौर पर यह देखा जाता है कि सिर में चोट लगने के बाद बात आई-गई हो गई. चौबीस घंटे के बाद सिर में दर्द चक्कर आना शुरू हो जाता है. उल्टी भी आने लगती है. इसे च्पोस्ट कन्कशन हेडेकज् कहते हैं. ऐसी समस्या होने पर भी तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए क्योंकि कई बार यह लंबे समय तक मरीज को परेशान कर सकता है.

जांच व इलाज

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सिरदर्द की पहचान मुख्यत: तीन प्रकार की जांच से की जाती है. इनमें है-सिटी स्कैन, रीढ़ के हड्डी से पानी निकालकर जांच करना तथा एमआरआई. इसके अलावा भी कई प्रकार की जांच की जाती है. सिर में हल्की चोट भी कभी-कभी परेशानी का कारण बन सकती है. इसमें आमतौर पर यह देखा जाता है कि सिर में चोट लगने के बाद बात आई-गई हो गई. बीमारी का पता चलने के बाद इसका इलाज किया जाता है. डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि आज भी कुछ लोगों में यह गलतफहमी है कि माइग्रेन का इलाज नहीं होता है. इस तरह की समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करनी चाहिए. माइग्रेन आमतौर पर आनुवांशिक होता है. ट्यूमर की स्थिति में सबसे बेहतर विकल्प ऑपरेशन होता है.  ब्रेन हैमरेज की स्थिति में भी ऑपरेशन की जरुरत पड़ती है, लेकिन यह जरुरी नहीं कि हर तरह के ब्रेन हैमरेज में ऑपरेशन ही हो. सामान्य तरह के सिरदर्द में मरीज को स्वयं पहचान करनी चाहिए कि उन्हें किस वजह से सिरदर्द होता है. कारणों की पहचान कर उससे परहेज करें सिरदर्द स्वत: ठीक हो जाएगा.

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