विपक्ष पर भड़के मनमोहन

नई दिल्ली, 7 सितंबर.  कोयला ब्लॉक आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष द्वारा संसद की कार्यवाही बाधित किए जाने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि संसद का मानसून सत्र बेकार चला गया. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट पर विपक्ष ने चर्चा का मौका गंवा दिया.

विपक्ष को और जिम्मेदार होना चाहिए. शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाने पर प्रधानमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट पर संसद और लोक लेखा समिति (पीएसी) में चर्चा होनी चाहिए लेकिन विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर संसद में सीएजी रिपोर्ट पर चर्चा कराने का मौका गंवा दिया. संसद का मॉनसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाने के बाद राष्ट्र के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि कोयला आवंटन पर कैग की रिपोर्ट को दबाया नहीं जाएगा और उसमें उठाए गए सभी मुद्दों पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक तनाव, जातीय हिंसा, नक्सलवाद से जूझ रहे देश के सामने आतंकवाद भी बड़ा खतरा है. उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट पर बहस के बिना कैग को मजबूती नहीं मिल सकती . प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया ठीक नहीं. विपक्ष के इस रवैये के चलते कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी.

संसद के दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

कोल ब्लॉक आवंटन मामले में मानसून सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को भी विपक्ष ने संसद में भारी हंगामा किया। हंगामा थमता न देख लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोवारा कार्यवाही शुरू होने पर फिर से हंगामा होता देख लोकसभा और राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे को लेकर भाजपा समेत एनडीए के सांसदों ने संसद परिसर में धरना दिया।

भाजपा ने साफ किया है कि पार्टी संसद के इस सियासी जंग को सड़कों पर ले जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि विदेश दौरे से लौटने के बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी तय सियासी जंग के कार्यक्रम का ऐलान किया जाएगा। मालूम हो कि कोयले पर कोहराम के चलते गुरुवार को लगातार 12वें दिन भी संसद में कोई कामकाज नहीं हो सका। सत्र के चार में से तीन सप्ताह कोयले पर हंगामे की भेंट चढ़ गए। वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव के बाद से 15वें संसद सत्र तक हुए कामकाज का विश्लेषण कर संसदीय व्यवस्था पर शोध संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने ये निष्कर्ष निकाला है कि इस सत्र में अब तक सबसे कम काम हुआ है। पीआरएस के मुताबिक, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के दूसरे कार्यकाल के दौरान 15वीं लोकसभा में 27 फीसदी कम काम हुआ है जो एनडीए के 2004-09 और 1999-2004 के कार्यकाल से भी कम है।

अब संसद के बाहर होगी लड़ाई : सुषमा

संसद का मानसून सत्र बेकार जाने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के बीच लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में हुई अनियमितताओं पर सरकार के साथ शुरू हुई लड़ाई अब संसद के बाहर लड़ी जाएगी. सुषमा ने कहा कि विपक्ष की तीन मांगें थीं और वे आगे भी बनी रहेंगी. उन्होंने कहा कि विपक्ष के रवैये के चलते संसद का मानसून सत्र बेकार चला गया.

मनमोहन सिंह के इस बयान के ठीक बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने कोयला ब्लॉक का आवंटन भ्रष्ट तरीके से किया. सरकार ने आवंटन का जो तरीका अपनाया वह गलत था. स्वराज ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में हुईं अनियमितताओं के खिलाफ जारी लड़ाई में पूरा विपक्ष एकजुट है. उन्होंने कहा कि सत्र का अवसान हुआ है, विपक्ष ने इस मुद्दे को छोड़ा नहीं है. सुषमा ने कहा कि उनकी पार्टी इस मसले को लेकर जनता के बीच जाएगी. विपक्ष की नेता ने सरकार से आवंटन रद्द कर मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की. पीएम के इस आरोप पर कि विपक्ष ने सीएजी कि रिपोर्ट पर चर्चा नहीं होने दी, इस पर उन्होंने कहा कि हम रिपोर्ट पर केवल कोरी चर्चा नहीं चाहते थे. उन्होंने कहा कि संसद चलाने की शर्तें सरकार ने नहीं मानी और अब उसे जनता के दबाव में खदानों के आवंटन रद्द करने पड़ेंगे.

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