सिविल सर्विस-डे के मौके पर पीएम ने कहा

नई दिल्ली, 21 अप्रैल. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा है कि अधिकारियों को कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकना चाहिए। उन्होंने सिविल सर्विस डे के मौके पर कहा कि ईमानदार अफसरों को सुरक्षा दी जाएगी।  पीएम ने कहा कि अफसरों को फैसले ना लेने की प्रवृति को छोडऩा होगा।

सरकार में नीतिगत पक्षाघात होने के आरोपों का सामना कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज नौकरशाहों से फैसले लेने में दृढ़ता दिखाने का आह्वान किया और उन्हें आश्वासन दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के नाम पर किसी को निशाना नहीं बनाया जाएगा। लोकसेवक दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम में सिंह ने नौकरशाहों से कहा कि उनके मन में जो डर बैठा है कि यदि चीजें गड़बड़ हो गयी तो उन्हें उसके लिए सजा मिल सकती है और वे इस भय से कोई फैसला नहीं ले रहे हैं, उन्हें इस प्रवृति से लडऩे की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह हमारा प्रयास हो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के नाम पर किसी को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। यह हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है कि ऐसी व्यवस्था और माहौल तैयार किया जाए जिसमें हमारे नौकरशाह निर्णायक बनने के लिए उत्साहित हों तथा किसी को भी फैसले लेने में बिना किसी दुर्भावना के भूल हो जाने पर उत्पीडि़त नहीं किया जाए।’ हालांकि सिंह ने यह भी कहा कि पता नहीं यह गलत है या सही, लेकिन यह अवधारणा बढ़ती जा रही है कि आम तौर पर नौकरशाहों और जनसेवकों की नैतिक शक्ति अब उतनी मजबूत नहीं है जितना कुछ दशक पहले होती थी और अब नौकरशाहों के अपने कामकाज के दौरान बाहरी दबाव के सामने झुकने की अधिक संभावना होती है।

उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि इस अवधारणा को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया हो, लेकिन मुझे लगता है कि इसमें थोड़ी बहुत सचाई तो है।’ इस बात पर बल देते हुए कि नौकरशाह जो फैसले लेते हैं, वे निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ हों, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार उन ईमानदार और सार्थक नौकरशाहों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है, जिनसे हो सकता है कि अपने कामकाज के दौरान सही मायने में भूल हो गयी हो। सिंह ने कहा, ‘कोई नौकरशाह, जो फैसले नहीं लेता हो, हो सकता है, वह हमेशा सुरक्षित रहे, लेकिन अंतत: समाज और देश के प्रति उसका योगदान कुछ भी नहीं होगा।

‘उन्होंने इस अवसर पर इस बात पर भी बल दिया कि केंद्र ने पिछले एक साल में विधायी ढांचा को मजबूत करने तथा देश की प्रशासनिक पद्धतियों में जान फूंकने के मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति की है ताकि सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार से बेहतर ढंग से लड़ा जा सके। इस बात पर बल देते हुए कि अपनी विफलताओं और कमियों को स्वीकार करने में ईमानदार बनने की जरूरत है, प्रधानमंत्री ने कहा कि नौकरशाह जो फैसले लेते हैं, वे निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ हों और समुचित सबूतों और गहन विश्लेषण पर आधारित हों तथा देश के सर्वश्रेष्ठ हितों को पूरा करने लायक हों। उन्होंने कहा, ‘उनके फैसले और उनकी सलाह राजनीतिक नेतृत्व की प्रकृति और रंगढंग से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होगा तो सार्वजनिक प्रशासन में फैसले लेने की प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता से समझौता होगा और हमारे कामकाज की गुणवत्ता कम होगी। यह एक ऐसी नजर है जिसे नौकरशाह को हमेशा बनाए रखना चाहिए।’

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