अंतरराष्ट्रीय मंदी और यूरो संकट ने ढाया कहर

एक डॉलर की कीमत 54.42 रुपए

मुंबई, 16 मई. भारतीय मुद्रा रुपये की कीमत कमजोर वैश्विक रुझानों के बीच देश की अर्थव्यवस्था के बारे में खराब अनुमानों और बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण बुधवार को डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकार्ड 54.42 पर आ गई. बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 1.18 फीसदी की गिरावट आई और यह 54.42 पर आ गया जो अब तक का निम्न स्तर है. इससे पहले दिसम्बर में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 54.30 तक आ गई थी, जो अब तक का निम्न स्तर था.

बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के बाद भी रुपये की कीमत में गिरावट जारी रही . बैंक ने पिछले सप्ताह निर्यातकों से कहा था कि वे अपने विदेशी पूंजी में से कम से कम 50 फीसदी राशि को रुपये में तब्दील करें. रिजर्व बैंक के इस कदम से करीब तीन अरब डॉलर के विदेश मुद्रा विशेषकर अमेरिकी डॉलर को रुपये में बदले जाने का अनुमान है. रिजर्व बैंक सितम्बर 2011 के बाद से अब तक रुपए की कीमत में गिरावट को रोकने के लिए 20 अरब डॉलर खर्च कर चुका है. मार्च से अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है जो प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे बड़ी गिरावट है. रुपये में देश की चालू खाते और वित्तीय घाटे से सम्बंधित चिंता के कारण गिरावट आई. धीमे आर्थिक विकास, उच्च महंगाई और नीतिगत असमंजस की धारणा के कारण भी रुपये में गिरावट रही. विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजारो के प्रमुख सूचकांकों में भी डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई. औद्योगिक विकास और महंगाई के ताजा आंकड़ों ने भी बाजार को निराश किया है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक खनन और विनिर्माण क्षेत्र में खराब प्रदर्शन के कारण मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.5 फीसदी कम रहा. केंद्रीय वाणिज्य उद्योग मंत्रालय द्वारा इस सप्ताह के शुरू में जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं की कीमत बढऩे के कारण महंगाई दर अप्रैल माह में बढ़कर 7.23 फीसदी दर्ज की गई, जो मार्च में 6.89 फीसदी थी.

हर तरफ मंदी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार एशिया के अन्य बाजारों में कमजोर रुख के बीच मंगलवार की तेजी के बाद सटोरियों की मुनाफावसूली से बाजार में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई है. जापान का निक्केई करीब 1.5 फीसद गिरकर 8,762 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. सबसे ज्यादा गिरावट हैंगसेंग में दर्ज की जा रही है. हैंगसेंग में करीब 3 फीसदी की गिरावट है. दूसरी ओर ताईवान और शाघाई के बाजारों में भी गिरावट देखने को मिल रही है.

अर्थव्यवस्था काबू में

नई दिल्ली,16 मई, नससे. भारतीय बाजार में आयी मंदी के लिए यूरो संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय वजहों को जिम्मेदार ठहराते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठा रही है और घबराने की कोई बात नहीं है. मुखर्जी ने वित्त विधेयक पर राज्यसभा में हुयी चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बाजार में जो मंदी आयी है उसके लिए यूरो संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि मंदी से सिर्फ भारत ही नहीं प्रभावित हुआ है बल्कि पूरा एशिया और यूनान सहित अन्य देश भी प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर अनिश्चितता का माहौल बन गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार की स्थिति पर नजर है और घबराने की कोई स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि विकासशील अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्थिति से अछूता नहीं रह सकती. आर्थिक विकास दर 6.9 रहने का जिक्र करते हुए मुखर्जी ने कहा कि उच्च विकास दर हासिल करने के लिए हमें कदम उठाने होंगे. इस क्रम में उन्होंने कृषि, विनिर्माण क्षेत्र का नाम लिया जिससे न केवल सकल घरेलू उत्पाद में उनकी हिस्सेदारी बढ़ सके बल्कि रोजगार के मौके भी सृजित हो सकें.

न्होंने कहा कि पूर्वी भारत में हरित क्रांति के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर दिखने लगा है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है. उन्होंने कहा कि देश में चावल उत्पादन बढ़कर 10.3 करोड़ टन हो गया है जबकि कुल खाद्यान्न उत्पादन 25.3 करोड़ टन हो गया. भंडारण और जूट की बोरियों की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम लगातार भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और इसका असर दिख रहा है. उन्होंने कहा कि पहले पंजाब, हरियाणा के अलावा दो तीन अन्य राज्यों में सरकारी एजेंसी द्वारा खरीद की जाती थी. लेकिन अब विभिन्न राज्यों में अधिकतर खरीदारी सरकारी एजेंसियों  द्वारा की जा रही है जिससे भंडारण क्षमता पर दबाव बढ़ गया है. मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने घरेलू मांग बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि मनरेगा भी काफी लाभ दिख रहा है. उन्होंने कहा कि मनेरगा राशि में गड़बड़ी की शिकायतें हैं लेकिन इससे श्रमिकों को बेहतर मजूदरी मिलने लगी है. उन्होंने कहा कि इस लीकेज पर काबू के लिए विचार किया जा रहा है. उन्होंने इस संबंध में विचार करने के लिए एक समिति बनाए जाने की संभावना भी जतायी.

सेंसेक्स ने भी गोता लगाया

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई भारी गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है. बुधवार को दो सौ से ज्यादा अंक की गिरावट के साथ खुलने वाला सेंसेक्स दोपहर बारह बजे तक पांच माह के न्यूनतम स्तर 16 हजार के नीचे चला गया. इससे पहले यह इस वर्ष 12 जनवरी को 16 हजार के नीचे गया था.

वहीं रुपया भी पांच माह के अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया है. बुधवार को एशिया के अन्य बाजारों में कमजोर रुख के बीच संस्थागत और खुदरा निवेशकों की ताजा लिवाली से बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स करीब 252 अंक की गिरावट के साथ खुला.  बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 252.07 अंक गिरकर खुला. सेंसेक्स में मंगलवार 112 अंक की तेजी दर्ज की गई थी. वाहन, रीयल्टी, बैंक, पूंजीगत सामान तथा धातु खड के शेयरों में गिरावट देखी गई. इसी प्रकार, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी 75.05 अंक या 1.51 फीसद की गिरावट के साथ 4,867.75 अंक पर खुला. घरेलू बाजारों में टाटा मोटर्स सेंसेक्स का टॉप लूजर है. कंपनी के शेयर करीब 6 फीसदी लुढ़क कर 272 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं. इसके अलावा एफडीएफसी, बीएचईएल, मारुति सुजूकी, आईसीआईसीआई बैंक और डीएलएफ के शेयरों में गिरावट का रुख है. वहीं दूसरी ओर गेल इंडिया, ओएनजीसी और टीसीएस के शेयरों में मामूली तेजी देखने को मिल रही है.

भाजपा ने सरकार को घेरा

रूपये में लगातार गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा ने कहा कि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के बावजूद भी देश की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट आ रही है.  कहीं ऐसा तो नहीं कि डॉलर को मजबूत करने के लिए जानबूझकर रुपये का अवमूल्यन किया जा रहा है. भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि सरकार छह माह पहले इस बात पर जोर दे रही थी कि देश की अर्थव्यवस्था बहुत ही मजबूत है लेकिन छह माह बाद ही देश की अर्थव्यवस्था संकटकालीन स्थितियों से गुजरने लगी है.

श्री जोशी ने कहा कि सरकार रुपये के अवमूल्यन को लेकर क्या कर रही है इसका जवाब देना होगा. इस संदर्भ में आरबीआई क्या कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त सलाहकार कौशिक बसु यह बयान देते है कि 2०14 के पहले स्थितियों को संभाला नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि विदेशी के्रडीट ऐजेंसियां भी देश की अर्थव्यवस्था  के बारे में निगेटिव रिपोर्टिग कर रही थी अब भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को लेकर भी निगेटिव रिपोर्ट होने लगा है. ऐसी परिस्थितियों में भाजपा सदन में चर्चा चाहती है. सरकार यह बताए कि आखिर इन स्थियितों से उबरने के लिए कौन सा उपाय कर रही है.

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